पंजाब में बिजली संकट गहराया, 10-11 घंटे तक कटौती; राजपुरा में 3 तो तलवंडी साबो में 7 दिन का कोयला

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By EditorPublished On: September 12, 2026

जालंधर

पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी।

बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी।

शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है। 

पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है।

तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा
थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही। 

थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी।

इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।

राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी
जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है।

इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है।

इन प्लांटों की यूनिटें बंद
पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं।

शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई
जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है।

मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी
बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं।

बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं।