मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के तहत इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा का शुभारंभ करेंगे।
इस सेवा के तहत चलने वाली बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए परिवहन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
GPS से मिलेगी बसों की लाइव लोकेशन, पैनिक बटन से बढ़ेगी सुरक्षा
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में GPS और पैनिक बटन लगाए जाएंगे।
GPS के जरिए बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी, जबकि आपात स्थिति में पैनिक बटन यात्रियों की सुरक्षा में मदद करेगा।
इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
सेवा के तहत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसें संचालित होंगी। इंटरसिटी बसें दो या उससे अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएंगी।
इसका उद्देश्य प्रदेशवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
2031 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करते हुए 2031 तक करीब 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
इसके लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना के तहत हर साल करीब 2500 से 3000 नई बसें सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जोड़ी जाएंगी।
इंदौर-छिंदवाड़ा में ट्रेनिंग सेंटर, 5 रीजनल सेंटर भी होंगे तैयार
आधुनिक बसों के सुरक्षित संचालन के लिए चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके अलावा भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में 5 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर भी 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जाएंगे। इन केंद्रों पर चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों के संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।









