मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) में करीब 3.91 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो कमला नगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई है और न ही निगम ने किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई की है। इस स्थिति ने निगम की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले ने एमपीटी की आंतरिक वित्तीय प्रणाली पर भी कई प्रश्न खड़े किए हैं। यदि कथित वित्तीय अनियमितता वित्तीय वर्ष 2022-23 से फरवरी 2026 तक लगातार होती रही, तो हर वर्ष होने वाले ऑडिट में यह सामने क्यों नहीं आई? करोड़ों रुपये निगम के खाते में जमा नहीं हुए, इसके बावजूद आय-व्यय के मिलान के दौरान किसी स्तर पर यह गड़बड़ी कैसे नहीं पकड़ी गई?
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले महज 26 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में निगम ने दो अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया था, जबकि करीब 3.91 करोड़ रुपये के इस कथित गबन में अब तक किसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।
एमपीटी का दावा- रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी
एमपीटी के कंपनी सेक्रेटरी संदेश यशलहा के अनुसार, निगम ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर कमला नगर थाने को सौंप दी है और एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध भी किया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है।
वहीं मामले की जांच कर रहे एसआई शैलेंद्र सिंह राजावत का कहना है कि पर्यटन विकास निगम की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में कई तथ्य स्पष्ट नहीं हैं। जिस आउटसोर्स कर्मचारी को जिम्मेदार बताया गया है, उससे पूछताछ की जा चुकी है।
जिन ग्राहकों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है, उनसे भी संपर्क किया जा रहा है। सभी दस्तावेजों और तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
करोड़ों का कथित गबन
प्रारंभिक जांच के अनुसार, एमपीटी की मार्केटिंग शाखा में कार्यरत मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने होटल और जंगल सफारी बुकिंग के दौरान ग्राहकों से प्राप्त राशि निगम के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर ली।
जांच में यह भी सामने आया कि जूबो सॉफ्टवेयर में दो प्रकार की रसीदें तैयार की जाती थीं। एक श्रेणी की राशि नियमित रूप से एमपीटी के खाते में जमा होती रही, जबकि दूसरी श्रेणी की रकम बैंक खाते में जमा ही नहीं की गई। ग्राहकों को बुकिंग और सेवाएं मिलती रहीं, जिसके कारण यह कथित अनियमितता लंबे समय तक सामने नहीं आ सकी।
हर वर्ष बढ़ती गई रकम
- 2022-23: 39.16 लाख रुपये
- 2023-24: 56.13 लाख रुपये
- 2024-25: 1.19 करोड़ रुपये
- 2025-26 (फरवरी तक): 1.76 करोड़ रुपये
कुल कथित राशि: 3.91 करोड़ रुपये
सूत्रों के अनुसार, विभाग में 10 से 15 लाख रुपये की कुछ अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच चल रही है। हालांकि इन मामलों में भी अब तक किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे वित्तीय मामलों में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
एफआईआर में देरी पर भी उठे प्रश्न
मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि यदि कमला नगर थाना दो महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं कर रहा है, तो पर्यटन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग क्यों नहीं की?
क्या पुलिस आयुक्त या अन्य सक्षम अधिकारियों को कोई पत्र भेजा गया? इस संबंध में भी निगम की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।










