मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बना रही है। इस संदर्भ में, उन्होंने भगवान बुद्ध से प्रभावित प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों को एक बौद्ध सर्किट के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसमें सतधारा, सोनारी, सांची और उज्जैन जैसे प्रमुख स्थल शामिल होंगे। यह प्रयास प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और धार्मिक स्थलां को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति-2020 को विश्वविद्यालयों में प्राथमिकता से लागू करने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति-2020 को प्राथमिकता के रूप में लागू करने के महत्व को रेखांकित किया। इससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने और छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी। यह कदम राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक
गुरुवार को सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की छठवीं कार्यपरिषद की बैठक समता भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। इस बैठक में संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आचार्य प्रो. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ, महापरिषद के सदस्य प्रो. सत्य प्रकाश शर्मा, पद्मश्री कपिल तिवारी, अभय कात्यायन और प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा भी मौजूद थे।
महाकात्यायन पर शोध की आवश्यकता पर दिया बल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक महाकात्यायन पर शोध शुरू करने के महत्व पर बल दिया। महाकात्यायन का विश्वास था कि उन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को उज्जैन से मथुरा तक फैलाया। उनकी तार्किक तर्क और वाद-विवाद कौशल की कहानियां आज भी प्रेरणा देने वाली हैं। उनकी यात्रा बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति की प्रेरक कथा के रूप में प्रस्तुत की जाती है, जो धैर्य, ज्ञान और आत्म-अनुशासन के महत्व को दर्शाती है।
बौद्ध समाज का रजत जयंती सम्मेलन
बैठक में यह भी बताया गया कि आगामी नवम्बर माह में भोपाल में भारतीय बौद्ध अध्ययन सोसायटी का रजत जयंती सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को इस आयोजन की तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। यह सम्मेलन बौद्ध समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जो प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को और भी समृद्ध करेगा।
विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों की प्रगति
विश्वविद्यालय के कुलपति ने बैठक में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बालक एवं बालिका छात्रावासों का निर्माण पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इसके अलावा, शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक भवन और पुस्तकालय के निर्माण का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। ये विकास कार्य विश्वविद्यालय को और भी सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे हैं।