Twisha Sharma Case में समर्थ सिंह के वकील का बड़ा दावा, बोले देहज का सवाल ही नहीं पैदा होता, क्योंकि…

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By Raj RathorePublished On: May 24, 2026
Twisha Sharma Case

Twisha Sharma Case : ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में अब पति समर्थ सिंह की ओर से भी खुलकर पक्ष सामने आया है। इंदौर में समर्थ सिंह के वकील एडवोकेट आशीष शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले से जुड़े कई आरोपों पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह शादी पूरी तरह दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और दहेज या हत्या जैसे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

एडवोकेट आशीष शर्मा ने बताया कि समर्थ सिंह और ट्विशा शर्मा की मुलाकात एक मैट्रिमोनियल एप के जरिए हुई थी। करीब डेढ़ साल तक दोनों के बीच बातचीत चलती रही, जिसके बाद परिवारों की सहमति से दोनों ने शादी की। उन्होंने इसे “लव कम अरेंज मैरिज” बताया।

आर्मी बैकग्राउंड से जुड़े दोनों परिवार

वकील ने कहा कि दोनों परिवार पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि से आते हैं। समर्थ सिंह के पिता सेना में थे और शहीद हो चुके हैं। उनकी मां गिरिबाला सिंह उच्च सरकारी पद पर रह चुकी हैं, जबकि परिवार का एक सदस्य एयरफोर्स में कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार पर दहेज मांगने जैसे आरोप लगाना पूरी तरह गलत है और मामले को गलत दिशा देने की कोशिश की जा रही है।

हत्या के आरोपों को बताया निराधार

ट्विशा की हत्या किए जाने के आरोपों पर एडवोकेट आशीष शर्मा ने कहा कि वायरल सीसीटीवी फुटेज में ट्विशा सामान्य स्थिति में खुद जाती हुई दिखाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या की बात सामने आई है और बचाव पक्ष उसी आधार पर आगे बढ़ रहा है। वकील के मुताबिक हत्या के आरोप तथ्यहीन हैं और बिना सबूत के लगाए जा रहे हैं।

वकील ने बताया कि घटना के बाद सबसे पहले समर्थ सिंह ने ही ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा और तुरंत अस्पताल लेकर गए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि पहले पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई, लेकिन ऐसे हालात में किसी भी व्यक्ति की पहली प्राथमिकता सामने वाले की जान बचाना होती है।

प्रेग्नेंसी को लेकर भी दी सफाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्विशा की प्रेग्नेंसी को लेकर भी पक्ष रखा गया। एडवोकेट आशीष शर्मा ने कहा कि गर्भधारण के बाद ट्विशा बच्चा नहीं रखना चाहती थीं, जबकि समर्थ सिंह और उनकी मां चाहते थे कि बच्चा रखा जाए।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर दोनों डॉक्टर के पास काउंसिलिंग के लिए भी गए थे और मामला आपसी बातचीत के स्तर पर चल रहा था।

फरार नहीं थे समर्थ सिंह

समर्थ सिंह के फरार होने के आरोपों पर भी वकील ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था।

भोपाल सेशन कोर्ट और फिर जबलपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई। जब राहत नहीं मिली तो समर्थ सिंह ने खुद सरेंडर कर दिया। वकील ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह की जमानत निरस्त करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि उन्होंने अदालत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।