इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव-2026: सीएम मोहन यादव का फोकस शहरों के भविष्य पर, जानें कैसे बदलेगी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की तस्वीर

Author Picture
By Raj RathorePublished On: October 17, 2026

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहरी विकास के मॉडल, निवेश की संभावनाओं, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की शहरी जरूरतों पर फोकस कर रहे हैं। वे प्रदेश के विकास के लिए विशेषज्ञों, निवेशकों, स्टार्टअप्स और विभागों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करेंगे।

इसमें मध्यप्रदेश को आगे ले जाने के लिए कई पहलुओं पर चर्चा होगी। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन होने जा रहा है।

इसमें एक तरफ सीएम डॉ. यादव निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे, तो दूसरी तरफ नगरीय क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं, प्रस्तावित परियोजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बात होगी।

इसी दौरान कई प्रोजेक्ट का शुभारंभ, भूमि-पूजन और लोकार्पण होंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश में निवेश, नवाचार, आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करना है। इसमें भाग लेने के लिए कई निवेशकों, स्टार्टअप्स और युवाओं को बुलाया गया है। इसमें भाग लेने वाले ugconclave.mp.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं।

गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों में जल राशि के सुदृढ़-वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रयुक्त जल के पुनः चक्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉन्क्लेव में उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्चक्रण विजन पर भी चर्चा होगी।

इसका मुख्य उद्देश्य उपचारित जल का सुरक्षित-व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना, प्राकृतिक व ताजे जल स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता को कम करना, जल संरक्षण को नगरीय विकास की मुख्यधारा का अनिवार्य अंग बनाना है।

इसके अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों, कृषि एवं उद्यानों की सिंचाई सहित विभिन्न गैर-पेयजल आवश्यकताओं में उपचारित जल के उपयोग को प्राथमिकता देने और प्रोत्साहित करने के सुदृढ़ प्रावधान जैसे विषयों पर भी मंथन होगा।

अहम विषय होंगे चर्चा में शामिल

कॉन्क्लेव में टियर-2 शहरों के सुनियोजित विकास पर विशेष चर्चाएं होंगी। इन चर्चाओं में घनत्व, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर), आवासीय पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारों, रेरा स्वीकृतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) जैसे विषय शामिल होंगे।

इससे शहरों के विस्तार के साथ भूमि का बेहतर उपयोग, आवासीय सुविधाओं में सुधार और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बात पर जोर दे रहे हैं कि शहरों का जो भी विकास हो, वह निवेश अनुकूल, तकनीक आधारित और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप हो।

इसलिए कॉन्क्लेव में नीतिगत सुधारों और आधुनिक विकास मॉडलों पर विचार कर शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

‘अर्बन चैलेंज फंड’ के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं पर होगा मंथन

कॉन्क्लेव में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख नगरीय विकास परियोजनाओं की भौतिक प्रगति, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े दूरगामी रणनीतिक पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, नगरीय विकास की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

अर्बन कॉन्क्लेव में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संस्थानों-बैंकों के साथ अनुबंध किए जाएंगे, संबंधित एजेंसियों को ‘लेटर ऑफ अवॉर्ड’ प्रदान किए जाएंगे। अर्बन चैलेंज फंड के तहत प्रदेश के विभिन्न नगरों में संचालित और प्रस्तावित विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 2,753.10 करोड़ रुपये है।

इस वित्तीय नियोजन के माध्यम से इंदौर, उज्जैन और रीवा की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था के वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा सीवरेज नेटवर्क एवं उपचार संयंत्रों के व्यापक उन्नयन कार्य शामिल हैं।

इसी श्रृंखला में धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में ‘एकीकृत मंदिर क्षेत्र विकास’ की महत्वाकांक्षी परियोजना तथा रीवा नगर की सर्वसमावेशी जलप्रदाय योजना के कार्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है।

युवाओं की भागीदारी

अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य नवाचार, आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप इकोसिस्टम से प्रदेश का विकास करना है। इसलिए इसमें इंवेस्टर्स के साथ-साथ स्टार्टअप्स और युवाओं को भाग लेने के लिए बुलाया गया है। जो भी इस कॉन्क्लेव में भाग लेना चाहते हैं वे ugconclave.mp.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं।

कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश के शहरों में निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने, विकास परियोजनाओं को गति देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, शहरी सुविधाओं में सुधार और पर्यावरण के अनुकूल विकास मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए साझा कार्ययोजना तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।