Khajrana Mandir Indore : इंदौर अपनी स्वच्छता को लेकर देश ही नहीं, दुनिया भर में पहचान बना चुका है। लेकिन यह पहचान यूं ही नहीं मिली, इसके पीछे हर स्तर पर की जा रही बारीक और योजनाबद्ध मेहनत है। इसी का एक अनोखा उदाहरण है खजराना गणेश मंदिर, जहां रोजाना सैकड़ों किलो फूल निकलने के बावजूद एक भी फूल कचरे में नहीं फेंका जाता।
मंदिर में निकलने वाले फूल, पत्तियां और अन्य जैविक कचरे को रिसायकल कर खाद में बदला जाता है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया से मंदिर को आमदनी भी होती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलता है।
जीरो वेस्ट मॉडल बना मिसाल
मंदिर परिसर में ‘जीरो वेस्ट पिट’ तैयार की गई है, जहां भगवान को चढ़ाए गए सभी फूल-पत्तियां और ऑर्गेनिक वेस्ट एकत्र किया जाता है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े गोपाल पांडे के अनुसार, इस कचरे को एक तय प्रक्रिया से गुजारकर खाद तैयार की जाती है।
तैयार खाद का उपयोग पहले मंदिर के बगीचे में किया जाता है और जो खाद बचती है, उसे लोगों को बेच दिया जाता है। इस तरह मंदिर स्वच्छता के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी काम कर रहा है।
फूलों से खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में फूल और माला चढ़ाते हैं, जिससे रोजाना भारी मात्रा में फूल इकट्ठे हो जाते हैं। इन्हें कचरा गाड़ी में भेजने के बजाय मंदिर परिसर में ही एक विशेष यूनिट के जरिए प्रोसेस किया जाता है।
इस प्रक्रिया में पहले फूलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उनमें से धागे और अन्य अवशेष अलग किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें बंद मशीन में करीब 90 दिनों तक रखा जाता है। सड़ने के बाद इन्हें बाहर निकालकर धूप में सुखाया जाता है और फिर पीसकर पैक कर दिया जाता है।
नारियल और तरल खाद का भी उपयोग
मंदिर में केवल फूल ही नहीं, बल्कि नारियल के छिलकों का भी पूरा उपयोग किया जाता है। छिलकों को इकट्ठा कर क्रश किया जाता है और उससे कोकोपीट तैयार किया जाता है, जो पौधों के लिए बेहद उपयोगी खाद साबित होता है।
इसके अलावा, प्रोसेसिंग के दौरान फूलों से निकलने वाले तरल पदार्थ को भी अलग कर बोतलों में भर लिया जाता है, जिसका इस्तेमाल लिक्विड खाद के रूप में किया जाता है।
आम लोगों को भी मिल रहा लाभ
इस पहल का फायदा सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है। आसपास के लोग भी अपने यहां से निकले फूल इकट्ठा कर यहां लाकर खाद बनवाते हैं। यह जैविक खाद 20 से 25 रुपए में उपलब्ध होती है, जो सस्ती होने के साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।
इस तरह खजराना गणेश मंदिर ने स्वच्छता और रिसायकलिंग का ऐसा मॉडल पेश किया है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।











