जाने-माने उद्योगपति और प्रेस्टीज उद्योग एवं शैक्षणिक समूह के संस्थापक डॉ. एनएन जैन (नेमनाथ जैन) का बुधवार सुबह इंदौर में निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। पिछले सप्ताह ही 17 सितंबर को उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया था। उनका अंतिम संस्कार इंदौर के मेघदूत मुक्तिधाम में किया जाएगा।
रावलपिंडी में जन्मे डॉ. एनएन जैन ने विभाजन के बाद परिवार के साथ सबकुछ छोड़कर इंदौर का रुख किया। करीब 16 वर्ष की उम्र में इंदौर पहुंचे नेमनाथ जैन ने पढ़ाई के साथ नौकरी भी की। दशकों के संघर्ष और अनुभव के बाद उन्होंने प्रेस्टीज समूह की नींव रखी, जो आगे चलकर उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े समूह के रूप में स्थापित हुआ।
इंदौर के उद्योग जगत में बनाई अलग पहचान
डॉ. एनएन जैन को इंदौर में उद्योग जगत के प्रमुख नामों में गिना जाता था। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था। प्रेस्टीज ग्रुप के संस्थापक चेयरमैन के रूप में उन्होंने सोयाबीन की खेती के एकीकृत विस्तार और सोया आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने सोया प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, सोया तेल, पशु आहार, आटा मिलिंग और सोया मील के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय तक काम किया। उनके प्रयासों से भारतीय सोया उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ी।
‘सोया मैन ऑफ द मिलेनियम’ के नाम से मिली पहचान
सोयाबीन की खेती और उससे जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में योगदान के चलते डॉ. एनएन जैन को ‘सोया मैन ऑफ द मिलेनियम’ के नाम से भी जाना गया। ‘द सार्क ऑयल्स एंड फैट्स टुडे’ ने उन्हें यह उपाधि दी थी। सोया उद्योग में उनके योगदान के लिए बाद में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
पढ़ाई के साथ मिल में करते थे नौकरी
डॉ. एनएन जैन की पहचान टेक्नोक्रेट और पहली पीढ़ी के उद्यमी के रूप में बनी। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया। इंदौर आने के बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ एक मिल में नौकरी की। बाद में इंदौर से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अपने बैच के प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल रहे।
30 साल नौकरी के बाद खड़ी की प्रेस्टीज की नींव
करीब तीन दशक तक नौकरी करने के बाद डॉ. एनएन जैन ने कैटल फीड प्लांट के रूप में प्रेस्टीज समूह की शुरुआत की। इसके बाद समूह ने कृषि और खाद्य क्षेत्र में विस्तार किया। समय के साथ प्रेस्टीज समूह का सोया उत्पादों और एग्री-बिजनेस का कारोबार करीब 40 देशों तक पहुंचा।
इसके साथ ही डॉ. एनएन जैन ने शिक्षा के क्षेत्र में भी समूह का विस्तार किया। इंदौर के अलावा देवास और ग्वालियर में प्रेस्टीज संस्थानों की स्थापना हुई। बाद में उन्होंने प्रेस्टीज यूनिवर्सिटी की भी स्थापना की। उनके निधन से इंदौर के उद्योग और शिक्षा जगत में शोक की लहर है।











