इंदौर में बढ़ती गर्मी के साथ जलसंकट लगातार गहराता जा रहा है। शहर में पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच नर्मदा प्रोजेक्ट को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जलूद से इंदौर भेजे जा रहे पानी और शहर तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा में रोजाना भारी अंतर दर्ज किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक नर्मदा तृतीय चरण के तहत जलूद से जितना पानी लिफ्ट किया जा रहा है, उतना पानी इंदौर तक पहुंच ही नहीं रहा। रिकॉर्ड के अनुसार रोजाना 12 से 48 एमएलडी तक पानी का अंतर सामने आया है।
करोड़ों लीटर पानी का हिसाब गायब
एक एमएलडी यानी 10 लाख लीटर पानी के हिसाब से देखा जाए तो हर दिन 1.2 करोड़ से लेकर 4.8 करोड़ लीटर तक पानी रास्ते में कम हो रहा है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय के मानकों के अनुसार एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में जितना पानी गायब हो रहा है, उससे करीब 88 हजार से लेकर 3.5 लाख लोगों की जरूरत पूरी हो सकती थी।
मार्च में नोटिस, मई में फिर बिगड़े हालात
मार्च महीने में नगर निगम ने इस गंभीर गड़बड़ी को लेकर जांच शुरू की थी। उस दौरान दो निजी कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
निगम ने दावा किया था कि पानी सप्लाई में आ रही कमी जल्द दूर कर ली जाएगी, लेकिन मई में हालात और खराब हो गए। शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है।
पूरी पंपिंग के बाद भी नहीं भर रहीं टंकियां
नर्मदा परियोजना के प्रथम और द्वितीय चरण से करीब 96 एमएलडी तथा तृतीय चरण से लगभग 350 एमएलडी पानी सप्लाई किया जा रहा है। यह पानी जलूद से करीब 70 किलोमीटर दूर विभिन्न पंपिंग स्टेशन और फिल्टर प्लांट के जरिए इंदौर पहुंचता है।
इसके बावजूद शहर की 106 पानी की टंकियां पूरी तरह नहीं भर पा रही हैं। इसका सीधा असर जल वितरण व्यवस्था पर पड़ रहा है और कई इलाकों में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।
कचरे से प्रभावित हो रही पंपिंग
जलूद स्थित इंटेकवेल तक पहुंचने वाली नहर में प्लास्टिक, कचरा और गंदगी जमा होने के कारण पंपिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पानी का डिस्चार्ज कम हो जाता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए नहर की सफाई कराई जा रही है और 30 मीटर लंबी डबल स्क्रीनिंग जाली लगाने का काम शुरू किया गया है, ताकि कचरा पंपिंग सिस्टम तक न पहुंच सके।
मार्च के आंकड़ों ने खोली पोल
नर्मदा प्रोजेक्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च महीने में औसतन 348 एमएलडी पानी सप्लाई किया गया, लेकिन इंदौर तक सिर्फ करीब 316 एमएलडी पानी ही पहुंच पाया। यानी करीब 32 एमएलडी पानी का अंतर सामने आया।
पूरे महीने के रिकॉर्ड में हर दिन 12 से 48 एमएलडी तक का अंतर पाया गया। इसके बाद निगम प्रशासन ने संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया।
अब कंपनियों से मांगा गया जवाब
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने पूछा है कि पूरी क्षमता से पंपिंग के बावजूद शहर तक पानी कम क्यों पहुंच रहा है। प्रोजेक्ट में कार्य विभाजन के अनुसार चिमरटेक कंपनी की जिम्मेदारी जलूद से पानी लिफ्ट कर वांचू पॉइंट तक पहुंचाने की है, जबकि रामकी कंपनी शहर की टंकियों तक पानी वितरण का काम देख रही है।
अब जांच की जा रही है कि कमी पानी लिफ्टिंग के दौरान हो रही है या वितरण व्यवस्था में लीकेज और तकनीकी खराबी के कारण पानी रास्ते में कम हो रहा है।











