स्वच्छता में बहुत पीछे है, इंदौर का मॉडल अपनाएंगे… इंदौर में बोले पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष

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By Raj RathorePublished On: August 20, 2026

स्वच्छता के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका इंदौर अब पश्चिम बंगाल के लिए रोल मॉडल बन रहा है। पश्चिम बंगाल के रूरल डेवलपमेंट एवं पंचायत मंत्री दिलीप घोष गुरुवार को अधिकारियों की टीम के साथ इंदौर पहुंचे।

टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का बारीकी से निरीक्षण किया और यह समझने की कोशिश की कि इंदौर ने लगातार स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी स्थिति कैसे मजबूत बनाए रखी है।

पश्चिम बंगाल से आई टीम में आईआईटी के प्रोफेसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंजीनियर और अन्य अधिकारी शामिल थे। टीम ने इंदौर के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से लेकर घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे के सेग्रीगेशन, परिवहन और प्रोसेसिंग तक की पूरी व्यवस्था को समझा।

कैसे बना इंदौर देश का सबसे साफ शहर, यह जानने पहुंची टीम

मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि इंदौर आज ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अग्रणी रहा है और सबसे बड़ी बात यह है कि शहर ने इस व्यवस्था को लगातार बनाए रखा है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की टीम यह समझने आई है कि इंदौर ने स्वच्छता का यह मॉडल कैसे तैयार किया और इसे लगातार प्रभावी तरीके से कैसे संचालित किया जा रहा है। टीम ने सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और कचरे के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को समझा।

घर-घर कचरा संग्रहण से प्रोसेसिंग तक समझी व्यवस्था

बंगाल की टीम ने इंदौर में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था का निरीक्षण किया। इसके बाद गीले और सूखे कचरे के सेग्रीगेशन, कचरे के परिवहन और अलग-अलग स्तर पर उसकी प्रोसेसिंग की प्रक्रिया की जानकारी ली।

टीम ने नगर निगम के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी दौरा किया और यह समझा कि शहर में सफाई व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जाती है। अधिकारियों ने कचरा संग्रहण वाहनों की मॉनिटरिंग और शहर की सफाई व्यवस्था से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की भी जानकारी दी।

‘स्वच्छता के मामले में बंगाल अभी काफी पीछे’

मंत्री दिलीप घोष ने स्वीकार किया कि स्वच्छता के मामले में पश्चिम बंगाल अभी इंदौर से काफी पीछे है। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद स्वच्छता और व्यवस्था सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कुछ व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में इंदौर के मॉडल को समझकर चरणबद्ध तरीके से वहां भी इस तरह की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

‘मध्य प्रदेश ने 10 साल पहले जो शुरू किया, अब हम कर रहे हैं’

दिलीप घोष ने कहा कि मध्य प्रदेश में जिन व्यवस्थाओं पर करीब 10 साल पहले काम शुरू हो गया था, पश्चिम बंगाल में अब उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग योजनाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों को दूर करने पर भी काम कर रही है।

उन्होंने आवास प्लस योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि सर्वे में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। उनके मुताबिक करीब 30 लाख आवास के लिए राशि दी गई, लेकिन इनमें 7,500 से अधिक लोग पात्र नहीं पाए गए। ऐसे मामलों में राशि की रिकवरी की जा रही है।

रिकॉर्ड का मिलान कर अपात्र लोगों को सिस्टम से बाहर करने की तैयारी

मंत्री ने कहा कि इसी तरह मतदाता सूची से जुड़े SIR के दौरान हटाए गए करीब 91 लाख नामों में से लगभग 58 हजार ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो नागरिक नहीं हैं। ऐसे नामों को भी हटाने की प्रक्रिया की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग रिकॉर्ड का मिलान कर अपात्र लाभार्थियों और गलत तरीके से सिस्टम में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और सरकारी धन के दुरुपयोग को कम करना है।

उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने में समय लगेगा, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।