इंदौर में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। औसत से कम बारिश और भूजल स्तर में लगातार गिरावट के चलते कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा ने पूरे इंदौर जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।
इसके साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी एवं अशासकीय नलकूपों की खुदाई पर तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, प्रतिबंध के बावजूद बोरिंग कराने या इसकी कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से बोरिंग करने पहुंचने वाली मशीनों को जब्त भी किया जा सकेगा। हालांकि, सरकारी योजनाओं के तहत होने वाली नलकूप खुदाई को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के चलते फैसला
प्रशासन के मुताबिक, वर्ष 2026 में जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई है। दूसरी ओर, भूजल स्रोतों के अत्यधिक दोहन के कारण पेयजल स्रोतों और नलकूपों का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में नए निजी बोरवेल की खुदाई जारी रहने से आने वाले समय में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के शहरी और ग्रामीण अधिकारियों ने स्थिति को देखते हुए निजी नलकूपों की खुदाई पर रोक लगाने की अनुशंसा की थी। इसके बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 और संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया।
बोरिंग मशीन जब्त, 2 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान
आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए राजस्व, पुलिस और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से बोरिंग करने या इसकी कोशिश करने वाली मशीनों को जब्त किया जा सकेगा। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।
आदेश के उल्लंघन पर अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 के प्रावधानों के तहत 2,000 रुपये तक का जुर्माना, दो साल तक का कारावास या दोनों की सजा हो सकती है।
विशेष अनुमति से ही हो सकेगी नई बोरिंग
प्रशासन ने आपात और अपरिहार्य परिस्थितियों में नई बोरिंग की अनुमति देने का प्रावधान रखा है। संबंधित अपर कलेक्टर अपने क्षेत्र में निर्धारित शर्तों के अधीन अनुमति दे सकेंगे।
इसके लिए शहरी क्षेत्रों में नगर निगम के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी से जुड़े कार्यपालन यंत्री और ग्रामीण क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री की जांच रिपोर्ट जरूरी होगी। अनुमति केवल पंजीकृत एजेंसियों को दी जा सकेगी।
सरकारी योजनाओं को छूट, निजी जलस्रोत भी हो सकते हैं अधिग्रहित
आदेश के मुताबिक, सरकारी योजनाओं के तहत होने वाली नलकूप खुदाई पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इसके लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए नए खोदे गए निजी नलकूपों और पहले से मौजूद अन्य निजी जलस्रोतों का अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिग्रहण किया जा सकता है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन का यह कदम आगामी समय में पेयजल स्रोतों को सुरक्षित रखने और संभावित जलसंकट से निपटने के उद्देश्य से उठाया गया है।









