भाजपा से निष्कासन के करीब 18 महीने बाद पार्षद जीतू यादव की पहले पार्टी में वापसी हुई और अब शुक्रवार को उन्हें एमआईसी में भी जगह मिल गई। जीतू यादव की एमआईसी में वापसी का कई भाजपा नेताओं ने विरोध किया था, लेकिन विधायक रमेश मेंदोला के प्रयासों के आगे विरोध टिक नहीं सका।
जीतू यादव को विधायक रमेश मेंदोला का करीबी माना जाता है। भाजपा में उनकी वापसी के पीछे भी मेंदोला की अहम भूमिका रही। पार्टी में वापसी के बाद से ही मेंदोला उन्हें दोबारा एमआईसी में लाने के प्रयास में जुटे थे।
प्रदेश अध्यक्ष तक शिकायतें पहुंचने के कारण एमआईसी में वापसी का मामला लंबे समय से अटका हुआ था। इस दौरान विधायक गोलू शुक्ला ने भी जीतू यादव का समर्थन किया।
18 महीने से खाली था विभाग, फिर महापौर ने बदली जिम्मेदारी
जीतू यादव का निष्कासन खत्म होने के दिन ही एमआईसी को लेकर भी सियासी हलचल तेज हो गई थी। उनकी वापसी के आदेश के कुछ घंटे पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने करीब 18 महीने से खाली पड़े जीतू यादव के विभाग की जिम्मेदारी निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दी थी।
महापौर की ओर से इसके पीछे तर्क दिया गया था कि विभाग का काम प्रभावित हो रहा था। हालांकि, इस फैसले को लेकर सवाल भी उठे कि यदि काम प्रभावित हो रहा था तो यह जिम्मेदारी पहले क्यों नहीं सौंपी गई।
कमलेश कालरा के घर हंगामे के बाद हुआ था निष्कासन
जनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। घटना के बाद भाजपा संगठन में भी हलचल मच गई थी।
इस मामले में जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसके बाद भाजपा संगठन ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
पुलिस जांच में नहीं मिले पर्याप्त सबूत
मामले की जांच के दौरान पुलिस को जीतू यादव के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान से उनका नाम हटा दिया।
पुलिस के पूरक चालान में कहा गया कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले। इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ।











