83 करोड़ रुपये की लागत से बने इंदौर के नए 300 बिस्तरीय जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक बुजुर्ग महिला को स्ट्रेचर पर लाया गया, लेकिन उसे ओपीडी तक पहुंचाने के लिए कोई वार्ड बॉय या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। मजबूरी में परिजनों को ही करीब 50 मीटर तक स्ट्रेचर धकेलकर मरीज को भीतर ले जाना पड़ा।
परिजनों के मुताबिक, स्ट्रेचर भी ठीक से काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण उन्हें कई बार रास्ते में रुकना पड़ा। अस्पताल परिसर में लोगों की मौजूदगी के बावजूद मदद के लिए कोई कर्मचारी नजर नहीं आया।
उद्घाटन हुआ, लेकिन अस्पताल अब भी अधूरा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को अस्पताल का लोकार्पण किया था। हालांकि उद्घाटन के बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पा रहा है। 300 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में फिलहाल केवल करीब 50 बेड ही चालू हैं और अभी सिर्फ मेटरनिटी सेवाएं शुरू की गई हैं।
हृदय रोग, मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स सहित अन्य विभागों की सेवाएं शुरू नहीं होने से गंभीर मरीजों को अब भी दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं
अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव नजर आ रहा है। परिसर में कई स्थानों पर वाटर कूलर लगाने के स्थान तो चिन्हित किए गए हैं, लेकिन अब तक मशीनें नहीं लगाई गई हैं। ऐसे में मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पीने के लिए बाहर से पानी खरीदना या लाना पड़ रहा है।
लिफ्ट बंद, मरीजों को चढ़नी पड़ रही सीढ़ियां
अस्पताल की लिफ्ट भी फिलहाल बंद है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को सीढ़ियों के सहारे विभिन्न मंजिलों तक पहुंचना पड़ रहा है। वहीं कई वार्डों में बेड पहुंचने के बावजूद खुले में पड़े हैं, जिससे अस्पताल परिसर में आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
वार्ड तैयार, लेकिन उपकरणों का इंतजार
अस्पताल में मेटरनिटी ऑपरेशन थिएटर, एनआईसीयू और अन्य वार्डों का निर्माण पूरा हो चुका है। बेड भी लगा दिए गए हैं, लेकिन आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण इन वार्डों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा।
ऐसे में आधुनिक भवन तैयार होने के बावजूद अस्पताल अभी तक अपनी पूरी क्षमता से सेवाएं देने की स्थिति में नहीं पहुंच पाया है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।










