इंदौर में सुबह 4 बजे से पानी के लिए लग रही लाइनें, कॉलोनियों में भी टेंकर लेने को मजबूर लोग, बबलू भैया आपका ध्यान किधर है?

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By Raj RathorePublished On: May 4, 2026
Bablu Sharma Indore

Indore News : इंदौर, जो देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, इन दिनों गंभीर जलसंकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के बीच शहर के कई इलाकों में पानी के लिए लंबी कतारें आम हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि पॉश कॉलोनियों से लेकर निचली बस्तियों तक हर जगह एक जैसा दृश्य देखने को मिल रहा है – खाली बर्तन, सूखे नल और टैंकर का इंतजार।

शहर के लहैया कॉलोनी जैसे इलाकों में लोगों को सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि पानी भरने में रोजाना दो घंटे तक लग जाते हैं, जिसके बाद ही वे अपने काम पर जा पाते हैं। इलाके के सरकारी बोरिंग सूख चुके हैं और नर्मदा लाइन से भी बेहद कम पानी मिल रहा है।

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि 500 से 700 फीट तक खुदाई के बाद भी कई जगहों पर पानी नहीं मिल रहा। कई बार पानी भरने को लेकर लोगों के बीच विवाद और झड़पें भी हो रही हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाती हैं।

टैंकर पर निर्भरता, बढ़ा आर्थिक बोझ

रघुनंदन बाग जैसे इलाकों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां नर्मदा लाइन अभी तक पूरी तरह नहीं पहुंची है। यहां के लोग निजी टैंकरों और नगर निगम की टंकियों पर निर्भर हैं। मध्यम वर्गीय परिवार, जो पहले बोरिंग पर निर्भर थे, अब हर महीने 2 से 3 हजार रुपये केवल पानी खरीदने पर खर्च करने को मजबूर हैं।

लोग पानी लाने के लिए किराए पर वाहन तक कर रहे हैं, ताकि एक बार में ज्यादा से ज्यादा पानी जमा कर सकें और बार-बार लाइन में न लगना पड़े।

जिम्मेदारों पर उठे सवाल

शहर में गहराते जलसंकट के बीच अब नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते जल प्रबंधन को लेकर ठोस योजना नहीं बनाई गई। इसी वजह से आज हालात बिगड़ गए हैं।

नागरिकों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हुआ और अब हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में लोगों ने एमआईसी सदस्य बाबलू शर्मा के कामकाज को लेकर भी असंतोष जाहिर किया है और आरोप लगाया है कि पानी की समस्या को लेकर अपेक्षित स्तर पर प्रयास नहीं किए गए।

क्यों गहराया जल संकट?

शहर में जल प्रबंधन की कमी इस संकट का बड़ा कारण बनती जा रही है। बारिश के पानी के संरक्षण के नियम तो मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। नतीजा यह है कि वर्षा जल जमीन में समाने के बजाय नालों में बह जाता है।

इसके अलावा शहर के ऐतिहासिक जल स्रोत जैसे बिलावली और सिरपुर तालाब लगातार सिमटते जा रहे हैं, जिससे भूजल स्तर पर सीधा असर पड़ा है। नर्मदा परियोजना से आने वाले पानी का भी बड़ा हिस्सा लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो जाता है।