इंदौर में बीजेपी की पदयात्रा के लिए 50 रास्ते थे बंद, 6 घंटे जाम में फंसा शहर, बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए भी लगानी पड़ी गुहार

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By Raj RathorePublished On: October 30, 2026

इंदौर में शुक्रवार को भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

पदयात्रा का रूट महज डेढ़ किलोमीटर का था, लेकिन इसके लिए करीब 50 रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। सुबह 8 बजे से शुरू हुई इस व्यवस्था के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोग घंटों जाम में फंसे रहे।

इस अव्यवस्था का असर किसी की रोजी-रोटी पर पड़ा, तो कोई समय पर रेलवे स्टेशन नहीं पहुंच सका। एक पिता तेज बुखार से तपते अपने बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए पुलिस से रास्ता देने की गुहार लगाता रहा।

दूसरी ओर, पदयात्रा में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहन हूटर बजाते हुए निकलते रहे। ऐसे में सवाल उठने लगे कि राजनीतिक कार्यक्रम के लिए आम जनता की आवाजाही रोकने के बजाय बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

सुबह 8 बजे से बैरिकेडिंग, दोपहर तक परेशान होते रहे लोग

भाजपा की पदयात्रा सुबह 11 बजे सुभाष नगर से शुरू हुई और दोपहर करीब 1:30 बजे पाटनीपुरा चौराहे तक पहुंची। करीब डेढ़ किलोमीटर के इस मार्ग पर सुबह 8 बजे से ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मुख्य सड़कों के साथ आसपास की कॉलोनियों के रास्ते भी बंद कर दिए गए। भमोरी की ओर से पाटनीपुरा आने वाले मार्ग पर चार पहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।

ऑफिस, दुकान, स्कूल और मजदूरी के लिए घरों से निकले लोगों को रास्ते में बैरिकेडिंग मिली तो वे फंसकर रह गए। कई वाहन चालक वैकल्पिक रास्ते तलाशते रहे। लोगों की शिकायत थी कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि कौन-सा रास्ता कब तक बंद रहेगा और दूसरे मार्ग से कैसे निकला जा सकता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस व्यवस्था से पांच हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। नौकरीपेशा लोगों को कार्यालय पहुंचने में देरी हुई, जबकि मजदूरी करने वालों की दिनभर की कमाई पर भी असर पड़ा।

‘दिनभर काम नहीं करूंगा तो परिवार का पेट कैसे पालूंगा?’

जूनी इंदौर निवासी मजदूर राकेश जाट के लिए जाम केवल यातायात की परेशानी नहीं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण का सवाल बन गया। उन्होंने बताया कि रोज मजदूरी करने के बाद ही घर में शाम का खाना बन पाता है। सुबह करीब 9:30 बजे से वे परेशान थे और 11:30 बजे तक भी उन्हें राहत नहीं मिली थी।

राकेश ने कहा, “मैं मजदूर आदमी हूं। दिनभर काम करता हूं, तब शाम को घर में खाना बनता है। अगर दिनभर काम नहीं करूंगा, तो शाम को परिवार का पेट कैसे पालूंगा?”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए बीच बाजार में इस तरह रास्ते बंद करने के बजाय दूसरी व्यवस्था की जानी चाहिए। बैरिकेडिंग और मंच के लिए ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए, जहां आम लोगों के कामकाज पर असर न पड़े।

स्टेशन पहुंचने में लगे दो घंटे, यात्री की छूटी महाकाल एक्सप्रेस

ट्रैफिक अव्यवस्था के कारण रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ी। वाहन चालक राज शुक्ला सुबह 8 बजे स्टेशन के लिए घर से निकले थे। उन्हें उम्मीद थी कि वे सामान्य रास्ते से समय पर पहुंच जाएंगे, लेकिन जाम के कारण करीब दो घंटे लग गए।

राज के मुताबिक, यातायात पुलिस की ओर से बंद रास्तों और वैकल्पिक मार्गों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। इसी दौरान उनके सामने एक यात्री की महाकाल एक्सप्रेस छूट गई। यात्री को वाराणसी जाना था, लेकिन जाम में फंसने के कारण वह समय पर स्टेशन नहीं पहुंच सका।

तेज बुखार से तपते बच्चे को अस्पताल ले जाने में परेशानी

भागीरथपुरा निवासी पवन अपने तेज बुखार से पीड़ित बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहे थे। रास्ते में बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया। पवन के मुताबिक, वे करीब एक घंटे से परेशान थे और पुलिसकर्मियों से रास्ता देने की गुहार लगा रहे थे।

लेकिन रास्ता बंद होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान आपातकालीन जरूरतों और आम नागरिकों की आवाजाही के लिए पर्याप्त व्यवस्था होने पर सवाल खड़े करती है।

नेताओं के वाहनों के लिए रास्ता, आम लोग जाम में फंसे

पदयात्रा में शामिल होने के लिए जनप्रतिनिधि और भाजपा कार्यकर्ता अपने वाहनों से पहुंचे। आरोप है कि कई वाहन हूटर बजाते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर निकले और मुख्य मार्गों पर नेताओं व कार्यकर्ताओं के वाहन खड़े रहे। स्थानीय लोगों ने इन वाहनों को व्यवस्थित करने में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की शिकायत की।

लोगों का सवाल था कि जब आम वाहन चालकों को रोका जा रहा था और उन्हें रास्ते से हटाया जा रहा था, तो कार्यक्रम में शामिल होने आए नेताओं और कार्यकर्ताओं के वाहनों के लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच आम जनता की सुविधा कहां?

पदयात्रा के दौरान सामने आई परेशानियों ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और वीआईपी कार्यक्रमों के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

लोगों की शिकायत है कि रास्ते बंद करने से पहले न तो पर्याप्त वैकल्पिक मार्गों की जानकारी दी गई और न ही जरूरी काम से निकलने वाले नागरिकों की समस्याओं का उचित समाधान नजर आया।