राजधानी भोपाल में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए शहर के बाहरी क्षेत्र में एक नया फोरलेन पश्चिमी बायपास बनाया जाएगा। लगभग 31.61 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 3225 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह बायपास मंडीदीप-रतनपुर रोड से शुरू होकर कोलार-रातीबड़ और फंदाकलां होते हुए भोपाल-देवास मार्ग पर फंदा तक पहुंचेगा। इसके बनने से शहर के भीतर वाहनों की आवाजाही कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
इस प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जबलपुर और बैतूल की दिशा से आने वाले और इंदौर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी इन वाहनों को भोपाल शहर के भीतर से गुजरना पड़ता है, लेकिन बायपास बनने के बाद वे सीधे बाहरी मार्ग से निकल सकेंगे, जिससे समय और दूरी दोनों की बचत होगी।
एलाइनमेंट में बदलाव
पश्चिमी बायपास के एलाइनमेंट में बदलाव किया गया है। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने और भोज वेटलैंड क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए मार्ग में संशोधन किया गया है, ताकि पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े।
टेंडर प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, बदले हुए एलाइनमेंट के कारण पुराने टेंडर की शर्तों पर काम करना संभव नहीं था, इसलिए देरी के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। अब पुराने टेंडर के आधार पर ही सहमति बनाकर काम शुरू करने का निर्णय लिया गया है, ताकि परियोजना में और देरी न हो।
मॉडल में बदलाव
किसानों की मांग को देखते हुए सरकार ने इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड रोड परियोजनाओं के मॉडल में बदलाव किया है। पहले इन्हें एक्सेस कंट्रोल सिस्टम पर विकसित किया जाना था, लेकिन अब इन्हें नॉन एक्सेस कंट्रोल सिस्टम के तहत बनाया जाएगा, जिससे वाहन कहीं से भी प्रवेश और निकास कर सकेंगे।
किसानों की मांग पर लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की बैठक में किसानों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए यह अहम बदलाव मंजूर किया। इससे स्थानीय लोगों और किसानों को अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।











