अखिलेश यादव का आरोप: जनता का ध्यान भटकाने के लिए लाई जा रही यूसीसी

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By EditorPublished On: September 15, 2026

लखनऊ 

यूसीसी को लेकर अमित शाह के बयान पर अखिलेश की प्रतिक्रिया आई है।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूसीसी लागू करने के ऐलान पर पहली प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यूसीसी के मुद्दे को लेकर तंज कसा है। अखिलेश ने कहा कि हम तो बस इतना कहेंगे कि पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ। नया जुमला न लेकर आओ और न जनता को बहकाओ। 15 लाख खाते में पहुंचाओ। दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने बीते दिनों NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था।

अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि जनता समझ रही है कि भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है, दरअसल उसकी पूर्ण रूप "अंडरग्राउंड कम्युनल कॉन्सपिरेसी" है। उन्होने सोशल मीडिया पर जारी बयान में भाजपा के पुराने चुनावी वादों को याद दिलाते हुए कहा कि सरकार को नए मुद्दे उठाने से पहले पिछले वादों को पूरा करना चाहिए। इसमें लोगों के खातों में 15 लाख रुपये पहुंचाने और दो करोड़ रोजगार देने जैसे वादों का जिक्र किया गया।

अखिलेश ने भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर भी सवाल उठाया
बयान में तंज कसते हुए कहा गया- "पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ। नया जुमला न लेकर आओ और न जनता को बहकाओ।" अखिलेश ने भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार को पहले इन दावों को जमीन पर साबित करना चाहिए।

सपा पीडीए को एकजुट कर भाजपा सरकार हटाएगी: अखिलेश
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि यूपी के भविष्य और आने वाली पीढ़ी की खुशहाली के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना लोकतंत्र के हित में है। यूपी की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चौपट है। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार की हद हो गई है। इसलिए भाजपा सरकार को सत्ता से हटाना ही एकमात्र उपाय है। समाजवादी पार्टी पीडीए को एकजुट करके यूपी से भाजपा सरकार का सफाया करने के लिए संकल्पित है।

बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक मुद्दे उठाए जा रहे
उन्होंने कहा है कि इसके साथ ही स्कूलों को बंद होने से बचाने, बेटियों को सुरक्षा देने, महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। बयान में लगातार दोहराया गया कि "यूसीसी फिर बाद में लाओ"। विपक्ष ने आरोप लगाया कि रोजगार, महंगाई, शक्षिा, महिला सुरक्षा और अन्य बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक मुद्दे उठाए जा रहे हैं।