असंगठित श्रमिकों के लिए वरदान बनी प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, जिले में 4,672 ने कराया पंजीयन

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By Raj RathorePublished On: February 24, 2026

कटनी जिले में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए चल रही प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना को लेकर पंजीयन और जागरूकता पर जोर बढ़ाया गया है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे कामगारों को वृद्धावस्था में न्यूनतम आय सुरक्षा देना है, जो नियमित पेंशन व्यवस्था से बाहर हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों को योजना की शर्तें, अंशदान और लाभ समझाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

यह योजना केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा पहल के रूप में लागू है। इसमें शामिल होने वाले पात्र लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान है। श्रम क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और सेवा केंद्र संचालक श्रमिकों को बता रहे हैं कि छोटी मासिक राशि जमा करके भी दीर्घकालिक पेंशन सुरक्षा बनाई जा सकती है।

कटनी में योजना को लेकर फील्ड स्तर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि असंगठित कामगार अक्सर बीमारी, काम छूटने या उम्र बढ़ने के बाद आय संकट से गुजरते हैं। ऐसे में पेंशन आधारित योजनाएं आय के स्थिर स्रोत की तरह काम करती हैं। योजना में शामिल होने के लिए आयु और आय से जुड़े मानकों का पालन जरूरी है।

कौन लोग योजना के लिए पात्र हैं

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनाई गई है। सामान्य रूप से इसमें वही लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये तक है और जिनकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच है। योजना में प्रवेश उम्र के अनुसार मासिक अंशदान तय होता है। लाभार्थी जितनी जल्दी जुड़ते हैं, उनकी मासिक किस्त उतनी कम रहती है।

इस योजना का लक्ष्य रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, खेतिहर मजदूर, ठेला संचालक, छोटे विक्रेता और अन्य दिहाड़ी आधारित कामगारों जैसे वर्गों को कवर करना है। स्थानीय स्तर पर श्रम विभाग पात्रता जांच के साथ लोगों को पंजीयन प्रक्रिया समझा रहा है, ताकि गलत जानकारी के कारण आवेदन अटकें नहीं।

अंशदान और पेंशन का ढांचा

योजना में लाभार्थी को उम्र के मुताबिक मासिक अंशदान करना होता है। सामान्य जानकारी के अनुसार यह अंशदान 55 रुपये से 200 रुपये प्रति माह के बीच हो सकता है। लाभार्थी जितना अंशदान करता है, उतना ही योगदान केंद्र सरकार की ओर से भी निर्धारित ढांचे में जोड़ा जाता है। यही संयुक्त योगदान आगे चलकर पेंशन का आधार बनता है।

60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद पंजीकृत सदस्य को 3000 रुपये मासिक पेंशन मिलने का प्रावधान है। यह राशि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक परिवारों के लिए वृद्धावस्था में बुनियादी आर्थिक सहारा मानी जाती है। कई मामलों में परिवार को भी नियमानुसार पेंशन सुरक्षा का लाभ मिलता है, इसलिए पंजीयन को सामाजिक सुरक्षा निवेश की तरह देखा जा रहा है।

पंजीयन कैसे होता है

योजना में नामांकन के लिए आमतौर पर आधार और बैंक खाते का विवरण जरूरी होता है। पंजीयन कॉमन सर्विस सेंटर जैसे अधिकृत माध्यमों से किया जाता है, जहां लाभार्थी की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होती है। मासिक अंशदान की प्रक्रिया बैंकिंग प्रणाली से जोड़ी जाती है, ताकि भुगतान नियमित रहे और रिकॉर्ड पारदर्शी बना रहे।

कटनी में अभियान के दौरान लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि योजना में नाम जुड़वाने के बाद किस्तें समय पर जमा करना जरूरी है। भुगतान में लंबा अंतर आने पर लाभ प्रभावित हो सकता है। इसलिए लाभार्थियों को बैंक खाते में पर्याप्त राशि बनाए रखने और मोबाइल पर मिलने वाले संदेशों की जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

स्थानीय स्तर पर क्यों बढ़ी चर्चा

जिले में असंगठित कामगारों की संख्या बड़ी है और इनमें अधिकांश परिवार स्थायी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहते हैं। इसी वजह से योजना को लेकर हाल के समय में जागरूकता बढ़ाने की पहल तेज हुई है। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि पात्र कामगार छूटे नहीं और जिनका पंजीयन अधूरा है, वे आवश्यक दस्तावेज पूरे कर सकें।

योजना पर बढ़ती चर्चा का एक कारण यह भी है कि कम अंशदान के बदले तय पेंशन का प्रावधान सीधे कामगार परिवारों से जुड़ता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए यह मॉडल उपयोगी माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी आमदनी अनियमित रहती है और बचत की क्षमता सीमित होती है।

कटनी में जारी प्रयासों का फोकस यही है कि पात्र श्रमिक समय रहते योजना से जुड़ें और वृद्धावस्था के लिए न्यूनतम वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करें। श्रम और जनसेवा तंत्र से जुड़े माध्यम लोगों तक जानकारी पहुंचा रहे हैं, ताकि योजना का लाभ वास्तविक लक्षित वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।