Indian Aviation History: भारत के विमानन इतिहास में 15 अक्टूबर 1932 की सुबह एक स्वर्णिम तिथि के रूप में दर्ज है। इसी दिन दूरदर्शी जेआरडी टाटा ने कराची के ड्रिघ रोड हवाई अड्डे से एक छोटे से सिंगल-इंजन डी हैविलैंड पुस मॉथ विमान से उड़ान भरी थी। यह मात्र एक उड़ान नहीं, बल्कि भारत में एक विशाल एयरलाइंस साम्राज्य की नींव थी, जिसकी परिणति आगे चलकर एयर इंडिया के रूप में हुई।
यह उड़ान जेआरडी टाटा के उस जुनून का परिणाम थी, जो उन्होंने विमानन के प्रति बचपन से पाला था। उन्होंने 1929 में भारत का पहला पायलट लाइसेंस (नंबर 1 टैग के साथ) प्राप्त किया था। उनकी यह पहली उड़ान सिर्फ 25 किलो एयर-मेल यानी डाक के बस्तों के साथ हुई थी, जिसमें कोई यात्री नहीं था। इस ऐतिहासिक पल ने भारत को वैश्विक हवाई मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया।
टाटा एयर सर्विसेज की स्थापना
इसी सपने को साकार करते हुए जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयर सर्विसेज की स्थापना की। यह देश की पहली वाणिज्यिक एयरलाइन थी, जिसने डाक और यात्रियों के परिवहन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में इस उद्यम को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ब्रिटिश सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली, बल्कि हर भेजी गई चिट्ठी पर मात्र चार आने का शुल्क मिलता था।
खुद टाटा समूह के भीतर भी इस नए व्यापार मॉडल को लेकर संदेह था, लेकिन जेआरडी का आत्मविश्वास अटूट रहा। उनकी दृढ़ता का ही परिणाम था कि कंपनी ने पहले ही वर्ष में 60,000 रुपये का मुनाफा कमाया, जो उस समय के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी।
जुहू से अंतरराष्ट्रीय उड़ान
टाटा एयर सर्विसेज का प्रारंभिक संचालन मुंबई के जुहू से होता था, जहां एक मिट्टी का मकान कार्यालय के रूप में और खुला मैदान रनवे के तौर पर इस्तेमाल होता था। मानसून के दौरान जब जुहू का मैदान जलमग्न हो जाता था, तब जेआरडी अपना संचालन पूना से करते थे। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, एयरलाइन लगातार लोकप्रिय होती गई।
वर्ष 1946 में इसका नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया। भारत की आजादी के ठीक बाद, 1948 में एयर इंडिया ने एक और मील का पत्थर स्थापित किया, जब उसके ‘मालाबार प्रिंसेस’ विमान ने मुंबई से लंदन तक पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरी। 1953 में सरकार ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया, और जेआरडी टाटा को ही इसका पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 1978 तक बने रहे।
सात दशक बाद घर लौटी एयर इंडिया
राष्ट्रीयकरण के बाद एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस अलग-अलग संस्थाओं के रूप में कार्य करती रहीं। हालांकि, समय के साथ-साथ गलत नीतिगत फैसलों और कुप्रबंधन के चलते एयर इंडिया धीरे-धीरे घाटे में डूबती चली गई। आखिरकार, सरकार ने इसे बेचने का निर्णय लिया।
एयर इंडिया को वापस खरीदने के लिए कई बड़ी कंपनियों ने बोली लगाई, लेकिन इतिहास ने खुद को दोहराया। टाटा समूह ने इस दौड़ में विजय प्राप्त की। नियंत्रण खोने के लगभग सात दशक बाद, वर्ष 2022 में जेआरडी टाटा की इस ऐतिहासिक विरासत को टाटा ने एक बार फिर अपने स्वामित्व में ले लिया, मानो एयर इंडिया अपने घर लौट आई हो।











