संकल्प से सिद्धि तक: पर्यावरण बचाने को पत्रकारों ने निभाई ऐतिहासिक जिम्मेदारी

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By EditorPublished On: September 1, 2026

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पत्रकारों की ऐतिहासिक पहल, दोनों राज्यों के जिलाध्यक्षों व पदाधिकारियों ने संकल्प पूरा कर पेश की मिसाल

भोपाल/रायपुर:
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकार को सर्वोपरि रखते हुए 'अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति' ने एक ऐतिहासिक पहल की है। समिति द्वारा चलाए गए वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाकर हरियाली और जीवन संरक्षण का एक नया संदेश दिया गया है।
इस पुनीत महा-अभियान का सफल नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. कुमार सोनी, मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम बर्मन, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष द्रोणाचार्य दुबे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष कैलाश वास्तुकार सहित समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।
संकल्प से सिद्धि तक का सफर
इस अभियान की शुरुआत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने कम से कम एक वृक्ष लगाने का दृढ़ संकल्प लिया था। सभी ने अपने सामाजिक दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए, पहले से सुनिश्चित किए गए स्थानों पर पौधे रोपे। समिति की एकजुटता और सुनियोजित कार्ययोजना का ही परिणाम रहा कि मध्य प्रदेश में 3000 और छत्तीसगढ़ में 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया आभार, कहा- "यह प्रयास अत्यंत सराहनीय"
इस महा-अभियान की शानदार सफलता पर अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. कुमार सोनी ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्षों, प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, संभाग के संभागीय अध्यक्षों, सभी जिलों के जिलाध्यक्षों, जिला कार्यवाहक अध्यक्षों और समिति के एक-एक सदस्य का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
सोनी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा, "आप सभी ने इस पर्यावरण संरक्षण अभियान का हिस्सा बनकर जिस जिम्मेदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया है, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। पत्रकारों की कलम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनका यह योगदान समाज में एक नई चेतना लेकर आएगा"
समिति के इस कदम की हर तरफ जमकर प्रशंसा हो रही है और इसे पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।