योगी सरकार में मजबूत हुई बेसिक शिक्षा की नींव, कम्पोजिट विद्यालयों में 9 साल में 1.84 लाख शिक्षक बढ़े

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By EditorPublished On: October 18, 2026

लखनऊ

 उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों के दौरान विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के साथ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के कार्यकाल में विद्यालयों को आवश्यकता के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए गए। इसका असर कंपोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में हुई बड़ी वृद्धि के रूप में सामने आया है।

2016-17 में 918 थी शिक्षकों की संख्या

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कंपोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या वर्ष 2016-17 में महज 918 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,85,408 हो गई। यानी नौ वर्षों में कम्पोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में करीब 1.84 लाख की वृद्धि हुई है। यह बदलाव प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर विद्यालयों के एकीकरण तथा उनके नए स्वरूप में संचालन के साथ शिक्षक उपलब्धता बढ़ाने की प्रक्रिया को भी दर्शाता है।

प्रदेश में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के एकीकरण से विद्यालय परिसर कम्पोजिट विद्यालयों के रूप में सशक्त हुए हैं। इस पहल से शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिली है और शिक्षकों की संख्या में 26,488 की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे शैक्षिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिला है।

योगी सरकार में शिक्षक हित को प्राथमिकता

योगी सरकार की ओर से शिक्षक हित में भी कई कदम उठाए गए हैं। 5 लाख रुपये तक की मुफ्त कैशलेस चिकित्सा सुविधा, 58 करोड़ रुपए खर्च कर नियमित ट्रेनिंग (2026-27), मानव संपदा पोर्टल से छुट्टी एवं वेतन पाना आसान और प्रत्येक विद्यालय में सहयोग के लिए 2 टैबलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस तरह योगी सरकार में शिक्षक हित के साथ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। साथ ही विकसित प्रदेश की नींव भी सशक्त हुई है। 

कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या 225 से बढ़कर 24,605 हुई

वहीं योगी सरकार की पहल से कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 225 कंपोजिट विद्यालय थे, जिनकी संख्या 2025-26 में बढ़कर 24,605 हो गई। इस दौरान 24,380 विद्यालयों की वृद्धि दर्ज की गई। इन विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा आठ तक एक ही परिसर में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिल रही है। साथ ही प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा को एकीकृत कर शैक्षिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।