छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, संचार टावर कंपनी की ब्लैकलिस्टिंग का आदेश निरस्त

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By EditorPublished On: October 13, 2026

बिलासपुर.

संचार टावर लगाने वाली दिल्ली की कंपनी को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना जरूरी है.

कोर्ट ने कंपनी को 30 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश देते हुए कहा कि इसके बाद विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है. कंपनी के प्रोपराइटर शिव कुमार शर्मा ने याचिका में बताया कि पुलिस विभाग के लिए 33 टावर लगाने का ठेका मिला था. कंपनी ने निर्धारित समय में काम पूरा कर लिया, लेकिन उसे केवल 13 टावरों का भुगतान किया गया. शेष 20 टावरों में निविदा की शर्तों के अनुरूप काम नहीं होने की बात कहकर भुगतान रोक दिया गया. बकाया राशि को लेकर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कार्यवाही भी लंबित है.

कंपनी को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका 
कंपनी के अनुसार, 26 फरवरी 2026 को जारी पत्र में 15 मार्च तक कथित कमियां दूर करने को कहा गया था. ऐसा नहीं करने पर सुरक्षा राशि जब्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई. इसके बाद 16 जून 2026 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. कंपनी ने दलील दी कि ब्लैकलिस्ट करने से पहले उसे नोटिस या अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया. 

शर्तों के मुताबिक नहीं हुआ था टावरों का निर्माण
राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कंपनी को 20 टावरों में कमियां दूर करने का अवसर दिया गया था. उसे चेतावनी भी दी गई थी कि तय समय में सुधार नहीं करने पर सुरक्षा राशि जब्त करने के साथ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने यह भी बताया कि कंपनी ने 12 अगस्त 2025 के पत्र में टावरों का निर्माण निर्धारित तकनीकी शर्तों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार की थी और कमियां दूर करने समय मांगा था. कोर्ट ने तर्क से सहमत न होते हुए सुनवाई का अवसर देना जरूरी माना.