भोपाल
राजधानी भोपाल में सीलिंग और नोटिस देने के हो रहे विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी है। तीन दिन में 190 सीलिंग की गई थी, लेकिन चौथे दिन जीरो यानी, एक भी सीलिंग नहीं की गई। अफसर कार्रवाई करने से बचते रहे। उधर, नगर निगम, नगरीय प्रशासन और रहवासी अपने-अपने तर्क रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे हैं।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया, रहवासियों ने अरेरा कॉलोनी के जिन अवैध मॉलों की शिकायतें की थीं, उन पर अब तक सिलिंग की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, नगर निगम छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर रहा है। इसे लेकर नाराजगी है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर सभी दस्तावेज प्रस्तुत कर निगम की पक्षपात पूर्ण कार्रवाई की मांग की है। ताकि, न्यायालय से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।
नगरीय प्रशासन, निगम कमिश्नर भी दिल्ली में रहवासी इलाकों में कारोबार के इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इसमें निगम मोहलत मांग सकता है। नगरीय आवास एवं प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और निगम की ओर से पक्ष रखने के लिए वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी मिले हैं।
तीन दिन में इतनी हुई थी सीलिंग 31 अगस्त को निगम ने कुल 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। 1 सितंबर को संख्या घटकर 61 पर आ गई। वहीं, 2 सितंबर को सिर्फ 20 सीलिंग हुई। कुल आंकड़ा 190 पर पहुंच गया। चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं की गई। अधिकारियों ने बताया कि हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर टीम लगी रही। इसलिए सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई।
मंत्री विजयवर्गीय बोले- भोपाल का मास्टर प्लान जल्दी जारी होगा
कार्रवाई को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना कि सीलिंग की कार्रवाई से पूरे भोपाल के व्यापारी परेशान हो रहे हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग के सभी बड़े अधिकारी फिलहाल दिल्ली में हैं। इस मामले में उच्चतम वकीलों के साथ चर्चा की जाएगी और कोई न कोई ऐसा रास्ता निकाला जाएगा, जिससे भोपाल के लोगों को कोई नुकसान ना हो।
मंत्री ने कहा कि भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर भी चर्चा चल रही है। इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। सीलिंग कार्रवाई के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार के स्तर पर होने वाली चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
8 हजार दुकानदारों को दे चुका नोटिस बता दें कि नगर निगम एक महीने के अंदर 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। पिछले दिनों 24 घंटे के नोटिस दिए गए। इनमें स्पष्ट लिखा कि रहवासी भवन में कमर्शियल एक्टिविटी बंद कर लें, वरना सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में कई प्रतिष्ठानों पर स्वैच्छा से बंद करने के पोस्टर-बैनर भी लगा दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, पिछले चार दिन से व्यापारियों को नोटिस नहीं दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि नोटिस देने के बाद परीक्षण किया जा रहा है।









