एमपी किसानों के लिए बड़ा अपडेट, जानिए गेहूं, चना, मसूर और सरसों का तय समर्थन मूल्य, कितना मिलेगा MSP और बोनस

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By Pinal PatidarPublished On: February 28, 2026

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए इस रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर और सरसों की फसलों पर बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार ने इन प्रमुख फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पहले ही घोषित कर दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से कुछ फसलों पर अतिरिक्त बोनस देने का भी निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता से राहत मिल सके। गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार ने समयसीमा भी तय कर दी है।

गेहूं पर MSP और बोनस का लाभ

इस वर्ष मध्य प्रदेश में गेहूं का समर्थन मूल्य 2600 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। केंद्र सरकार ने 2585 रुपए प्रति क्विंटल MSP घोषित किया है, जबकि राज्य सरकार 15 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। गेहूं बेचने के लिए किसानों को 7 मार्च तक पंजीयन कराना अनिवार्य है। संभावना जताई जा रही है कि 15 मार्च से खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस बार बंपर उत्पादन की उम्मीद के चलते बड़ी मात्रा में उपार्जन की तैयारी की जा रही है।

चना और मसूर पर बढ़ी दरें

चना उत्पादक किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। इस साल चना का समर्थन मूल्य 5,875 रुपए प्रति क्विंटल रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपए अधिक है। चना विक्रय हेतु पंजीयन की अंतिम तिथि 16 मार्च निर्धारित की गई है और खरीदी 20 मार्च के बाद शुरू हो सकती है। वहीं मसूर की बात करें तो इसका समर्थन मूल्य 7,000 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 300 रुपए की वृद्धि की गई है। मसूर के लिए भी पंजीयन 16 मार्च तक किया जा सकेगा।

सरसों पर अतिरिक्त बोनस की सौगात

सरसों उत्पादकों को इस बार विशेष लाभ मिलने वाला है। राज्य सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य 6,200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष से 250 रुपए अधिक है। इसके अलावा सरसों की खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। इससे किसानों को कुल मिलाकर बेहतर आय सुनिश्चित होगी और तेलहन फसलों के प्रति रुझान बढ़ने की संभावना है।

भावांतर योजना से मिलेगा सुरक्षा कवच

इस बार किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी मिलेगा। यदि बाजार में फसल का भाव समर्थन मूल्य से कम रहता है, तो सरकार अंतर की राशि सीधे किसानों को देगी। इसका उद्देश्य यह है कि बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में भी किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। यह योजना किसानों के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।

खरीदी तिथियों का इंतजार

हालांकि सरकार ने अभी आधिकारिक तौर पर खरीदी की अंतिम तिथियां घोषित नहीं की हैं, लेकिन पंजीयन प्रक्रिया चारों फसलों के लिए जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के प्रारंभ में खरीदी की विस्तृत तारीखों की घोषणा की जा सकती है। किसानों को समय पर पंजीयन कराने और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है, ताकि उन्हें समर्थन मूल्य और बोनस का पूरा लाभ मिल सके।