दिवाली पर कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, चंडीगढ़ के कारोबारी ने टॉप परफॉर्मर्स को बांटीं 4 कारें

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By EditorPublished On: October 26, 2026

 चंडीगढ़
 दीवाली पर सिर्फ मिठाई और बोनस नहीं, गिफ्ट में कारें देने का जमाना आ गया है। गुजरात के मशहूर हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया की तरह चंडीगढ़ के फार्मा कारोबारी भी अपने इसी अंदाज की वजह से चर्चा में हैं।पिछले कुछ वर्षों से दीवाली पर कारें गिफ्ट करने वाले एमके भाटिया ग्रुप ने इस बार नया प्रयोग किया है, जिसमें कार पाने का मौका केवल बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले गार्ड से लेकर अधिकारी तक को लकी ड्रॉ के जरिए कार जीतने का अवसर मिलेगा।

इस पहल के तहत ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 18 महीने से काम कर रहे योग्य कर्मचारियों-अधिकारियों के नाम लकी ड्रॉ में शामिल किए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को कार देने की पुरानी परंपरा भी जारी रहेगी।इस पहल का संदेश है कि कंपनी की तरक्की में हर कर्मचारी का योगदान मायने रखता है। जहां टॉप परफॉर्मर्स को उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाएगा, वहीं लकी ड्रॉ अन्य योग्य कर्मचारियों को भी इस खास तोहफे का अवसर देगा।

इसके लिए बुधवार (28 अक्टूबर) को ड्रॉ होना है। इसमें कुल 35 लोग शामिल किए जाएंगे, जिनमें सिक्योरिटी गार्ड का नाम भी शामिल है। हालांकि, 4 कर्मचारियों को इस साल भी पुराने पैरामीटर पर कारें दी गई हैं। अभी वह 4 कारें और देने वाले हैं।पिछले साल दिवाली पर इन्हीं फार्मा कारोबारी ने 51 कारें अपने कर्मचारियों को गिफ्ट की थीं।

एमके भाटिया की यह पहल दीवाली गिफ्टिंग को केवल इनाम देने से आगे बढ़ाकर कर्मचारी सम्मान और सहभागिता से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।

कौन हैं एमके भाटिया?
एमके भाटिया मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाल हैं। मुजफ्फरनगर में मेडिकल स्टोर चलाते थे। 2002 में कारोबार में घाटा हुआ तो दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए। तब करोड़ों रुपये का कर्ज था। 2015 में चंडीगढ़ आए और यहां दवा कंपनी की शुरुआत की। अब  MITS Healthcare Private Limited समेत उनकी 12 कंपनियां चल रही हैं।

 

फार्मा कारोबारी ने ये जानकारी दी…

    18+ महीने से काम कर रहे कर्मी योग्य: फार्मा कारोबारी एमके भाटिया ने ड्रॉ के बारे में बताया कि ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 18 महीने से काम कर रहे योग्य कर्मचारियों के नाम लकी ड्रॉ में शामिल किए जाएंगे। इस साल लकी ड्रॉ के जरिए एक कार देने की घोषणा की गई है।

    सिक्योरिटी गार्ड भी हिस्सा: खास बात यह है कि इसमें कर्मचारी के पद के बजाय निर्धारित योग्यता को महत्व दिया जाएगा। यानी सिक्योरिटी गार्ड से लेकर उच्च पदों पर काम करने वाले कर्मचारी तक इस मौके का हिस्सा बन सकेंगे।

    टॉप परफॉर्मर्स को कार देने की परंपरा जारी रहेगी: उन्होंने बताया कि ग्रुप की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को कार देने की परंपरा भी जारी है। ऐसे कर्मचारियों को उनके काम और उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित किया जाएगा। वहीं, लकी ड्रॉ के जरिए दूसरे योग्य कर्मचारियों को भी कार जीतने का मौका मिलेगा। कारोबारी ने कहा कि इस तरह कंपनी ने प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कार देने के साथ कर्मचारियों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की है।

    हर कर्मचारी के योगदान को सम्मान देने की पहल: एमके भाटिया ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कंपनी की तरक्की में योगदान देने वाले हर कर्मचारी को महत्व देना है। आमतौर पर बड़े इनाम बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को मिलते हैं, लेकिन लकी ड्रॉ से अलग-अलग पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी बड़ा तोहफा पाने का अवसर मिलेगा।

15% डाउन पेमेंट, बाकी सैलरी से कटेगी EMI जानकारी के मुताबिक, एक गाड़ी की कीमत करीब 10.5 लाख रुपए है। गाड़ी खरीदते समय मालिक की तरफ से 15% डाउन पेमेंट की जाती है। बाकी रकम की ईएमआई कर्मचारी की सैलरी से हर महीने कटती रहती है। इसके अलावा, कर्मचारी को पेट्रोल के लिए हर महीने 2,500 रुपए भी दिए जाते हैं।

यूपी से आकर बनाई थी फार्मास्युटिकल कंपनी एमके भाटिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। मुजफ्फरनगर में ही वह एक मेडिकल स्टोर चलाते थे। 2002 में काम में गिरावट आ गई और दिवालिया होने की कगार पर आ गए। तब उनके सिर पर करोड़ों रुपए का कर्ज था। इसके बाद 2015 में वह चंडीगढ़ आ गए। यहां फार्मास्युटिकल कंपनी शुरू की। अब उनकी 12 कंपनियां चल रही हैं।

कारें देने का सपना साकार हुआ, अब पार्किंग की समस्या एमके भाटिया कहते हैं कि उनके ऑफिस पंचकूला और चंडीगढ़ में हैं। दिवाली गिफ्ट में देने के लिए वह पहले गाड़ियां कंपनी के नाम पर लेते थे, लेकिन अब सीधे एम्प्लॉई के नाम पर ही लेते हैं। अभी तक 100 से ज्यादा कर्मचारियों को गाड़ियां दे चुके हैं। अब ऑफिस के पास पार्किंग की समस्या होने लगी है। अब इसके लिए भी काम किया जा रहा है।