8th CPC Update: बेसिक सैलरी में जुड़ेगा महंगाई भत्ता? केंद्रीय कर्मचारियों की मांग और पुराने वेतन आयोगों का रिकॉर्ड

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By EditorPublished On: October 28, 2026

नई दिल्ली

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई है। वेतन बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन में बदलाव के साथ एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में बने हुए हैं। पिछले कुछ दिनों पहले जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में आठवें वेतन आयोग ने देश कई शहरों में बैठक की थी। इसमें दिल्ली, लद्दाख, कोलकाता और बेंगलुरु सहित कई बड़े शहर शामिल हैं। हाल ही में आयोग ने 23 अक्टूबर को मुंबई में अहम बैठक की थी। इसके बाद महंगाई भत्ते को लेकर कवायद तेज हो गई है।

कई प्रमुख यूनियनों और संघों ने 8वें वेतन आयोग से महंगाई भत्ते (DA), महंगाई राहत (DR) और बेसिक सैलरी (basic pay) के मामले में अहम सुधार की अपील कर चुके हैं। यूनियनों का कहना है कि इससे काम करने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाली राशि में उचित बढ़ोतरी का फायदा मिल सकेगा। इसी तरह एक और अहम मांग महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मिलाने की है। फिलहाल केंद्र सरकार के मौजूदा कर्मचारी और पेंशनभोगी अभी भी 8वें वेतन आयोग के 3 सदस्यीय पैनल की अंतिम सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं।

यूनियन ने की बदलाव की मांग
ऐसे में कर्मचारी यूनियनें मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही हैं, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई का बेहतर ढंग से सामना करने में मदद मिल सके। इन बदलावों में एक निश्चित महंगाई स्तर पर डीए (DA) का विलय (उदाहरण के लिए, यदि मंजूरी मिल जाती है तो डीए के 40% या 50% तक पहुंचने पर) और भत्ता तय करने के फॉर्मूले में संशोधन शामिल हैं। हालांकि, पिछले वेतन आयोगों के फैसलों से पता चलता है कि विलय (merger) अपने आप नहीं हो जाता है।

जानिए 5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोगों ने DA पर क्या किया था
5वें वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि जब भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधार सूचकांक से 50% बढ़ जाए, तो DA को 'महंगाई वेतन' (dearness pay) में बदल दिया जाना चाहिए। इस 'महंगाई वेतन' को सेवानिवृत्ति लाभों (retirement benefits) सहित सभी उद्देश्यों के लिए गिना जाना था। आयोग ने यह भी सुझाव दिया था कि सभी वेतन स्तरों के कर्मचारियों के लिए DA के माध्यम से महंगाई की 100% भरपाई (neutralisation) की जानी चाहिए।

छठे वेतन आयोग में क्या हुआ
दूसरी ओर, छठे वेतन आयोग ने एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। इस समय आयोग ने किसी भी स्तर पर महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मिलाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयोग ने तर्क दिया कि संशोधित वेतन ढांचे में पहले से ही कीमतों में बदलाव के आधार पर भत्तों और लाभों में समय-समय पर संशोधन करने की व्यवस्था मौजूद है। साथ ही आयोग ने हर तीन महीने में संशोधन की सिफारिश करने के बजाय, रणनीतिक रूप से साल में दो बार महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन करने की व्यवस्था को ही बनाए रखा।

7 वें वेतन आयोग में क्या हुआ
आखिरी में हाल ही के 7वें वेतन आयोग ने DA की गणना की मौजूदा पद्धति को ही जारी रखा। आयोग का कहना था कि यह फॉर्मूला पिछले कई सालों से काफी प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। इसने पूरी कार्यप्रणाली और पद्धति में किसी बड़े या व्यापक बदलाव की सिफारिश नहीं की।

कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग से क्या हैं उम्मीदें
कई प्रमुख कर्मचारी यूनियनों, संघों और पेंशनभोगी संगठनों ने इन अहम पैमानों को तय करने के तरीके में सकारात्मक बदलाव की अपनी मांगें फिर से उठाई हैं। जैसे 'फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस' (FNPO) ने मांग की है कि जब महंगाई भत्ता (DA) 25% से अधिक हो जाए, तो उसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए। इसके अलावा, भारत पेंशनर्स समाज ने DA और महंगाई राहत (DR) की समीक्षा छमाही के बजाय तिमाही आधार पर करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एक निश्चित सीमा के बाद DR को मूल पेंशन में मिलाने (मर्जर) पर विचार करने का भी आग्रह किया है।

इसी तरह, अन्य संगठनों ने यह सुझाव दिया है कि औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) की गणना पद्धति का बारीकी से विश्लेषण और समीक्षा की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इसमें घरेलू खर्चों और सरकारी कर्मचारियों के उपभोग के तरीकों को बेहतर ढंग से दर्शाया जाना चाहिए।

इन मांगों का 8वें वेतन आयोग पर क्या असर पड़ेगा?
आठवें वेतन आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसमें 3 सदस्यों का पैनल है। यह पैनल अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय प्रमुख यूनियनों की इन मांगों और टिप्पणियों पर बारीकी से विचार करेगा।

फिर भी आज की स्थिति के अनुसार, DA के विलय, गणना के फॉर्मूले में बदलाव और इसे वास्तव में लागू करने के समय पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए, जब तक केंद्र सरकार कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को यूनियनों के प्रस्तावों को केवल 'मांग' के रूप में ही देखना चाहिए।