सुस्ती में फंसा भारत, घाटे से जल्द निकलना होगा : IMF

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रवक्ता गेरी राइस का कहना है कि भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति हमारे पूर्व अनुमान से भी बेहद कमजोर है, यदि आर्थिक मोर्चा पर सफल होना है, तो जल्द सुधार करने होंगे, बल्कि भारत को एक रणनीति के तहत काम करना होगा।

उनका कहना है कि भारत का मौजूदा आर्थिक माहौल हमारे पूर्वानुमान की तुलना में कमजोर है। राइस ने कहा कि भारत को जल्द ही महत्वाकांक्षी संरचनात्मक और वित्तीय सुधार करने की जरूरत है, जिससे कि मध्यावधि में राजकोष बढ़े, इसके लिए भारत सरकार को एक विशेष रणनीति पर काम करना होगा। यानी कि भारत सरकार द्वारा अब तक अर्थव्यस्था में सुस्ती को दूर करने के लिए जो भी प्रयास किए गए हैं वो नाकाफी हैं।

फिलहाल सरकार की टैक्स इनकम होती है और खर्च भी उसी में करती है। जब सरकार का खर्च, राजस्व से बढ़ जाता है, तो उसे बाजार से अतिरिक्त राशि उधार लेना पड़ता है। सरकार की कुल कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यानी कि सरकार जो राशि उधार लेगी उसे ही राजकोषीय घाटा कहेंगे।

आईएमएफ ने कहा है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़त दर महज 4.8 फीसदी रहेगी। आईएमएफ ने कहा कि भारत और इसके जैसे अन्य उभरते देशों में सुस्ती की वजह दुनिया के ग्रोथ अनुमान को उसे घटाना पड़ा है। गौरतलब है कि सितंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी पर पहुंच गई थी, जो पिछले 6 साल का निचला स्तर है। वहीं लगातार 6 तिमाही से ग्रोथ रेट में गिरावट आ रही है।

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