Sanjeevani Multispeciality Hospital : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में संचालित संजीवनी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गया है। अधिवक्ता अभिषेक मालवीय द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई विस्तृत शिकायत में अस्पताल प्रबंधन पर सरकारी नजूल भूमि पर अतिक्रमण, आदिवासी भूमि के व्यावसायिक उपयोग, छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम के उल्लंघन तथा वित्तीय अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के साथ राजस्व आदेशों और दस्तावेजों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं, जिनमें भूमि आवंटन प्रक्रिया और उसके निरस्तीकरण का उल्लेख है।
जमीन का पूरा मामला क्या है?
शिकायत के अनुसार, ग्राम नमना कला, तहसील अंबिकापुर स्थित नजूल प्लॉट क्रमांक 613 (कुल रकबा 2.26 एकड़) में से 994.2 वर्गमीटर भूमि के प्रबंधन/आवंटन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
तत्कालीन दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- बाजार मूल्य का 150% प्रीमियम,
- 2% अतिरिक्त स्वामित्व शुल्क,
- 0.30% वार्षिक सेवा शुल्क,
- साथ ही अधोसंरचना एवं पर्यावरण शुल्क जमा करना था।
हालांकि जुलाई 2024 में राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी सर्कुलरों को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कलेक्टर सरगुजा ने संबंधित आवंटन को निरस्त कर दिया और नजूल अधिकारी को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
शिकायत में दावा किया गया है कि आदेश पारित होने के बावजूद जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया और अस्पताल का संचालन जारी है।
किन डॉक्टरों के नाम आए सामने?
शिकायत में कहा गया है कि अंबिकापुर के अजबनगर, न्यू बस स्टैंड के पास संचालित इस निजी अस्पताल का संचालन कथित रूप से इन डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है:
डॉ. अजय तिर्की
डॉ. अजय गुप्ता
डॉ. विकास अग्रवाल

CG Nursing Home Act का उल्लंघन
भूमि विवाद के अतिरिक्त शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल को सीमित संख्या में बेड संचालन की अनुमति दी गई है, लेकिन अस्पताल कथित रूप से अनुमति से अधिक बेड संचालित कर रहा है।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम का उल्लंघन माना जा सकता है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने की मांग की है।
आदिवासी भूमि और वित्तीय लेनदेन पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि आदिवासी समुदाय से जुड़ी है और उसका व्यावसायिक उपयोग संवैधानिक प्रावधानों, पांचवीं अनुसूची तथा प्रचलित कानूनों के विपरीत हो सकता है।
इसके साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि भूमि को गिरवी रखकर ऋण लेने अथवा वित्तीय लाभ उठाने का प्रयास किया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह आदिवासी भूमि संरक्षण संबंधी कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।
पूर्व के आरोप भी चर्चा में
शिकायत में अस्पताल से जुड़े एक साझेदार डॉ. अजय गुप्ता पर पूर्व में राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत कथित अनियमितताओं के आरोपों का उल्लेख किया गया है। आरोप था कि उपचार सामग्री की वास्तविक लागत और सरकारी दावा राशि में अंतर पाया गया था। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन से जुड़े डॉ. अजय तिर्की अंबिकापुर के पूर्व महापौर रह चुके हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- कलेक्टर द्वारा आवंटन निरस्त किए जाने के बाद भी अस्पताल का संचालन किस आधार पर जारी है?
- क्या बेड संचालन अनुमति के अनुरूप है?
- क्या आदिवासी भूमि का व्यावसायिक उपयोग विधिसम्मत है?
- क्या स्थानीय प्रशासन ने पर्याप्त और समयबद्ध कार्रवाई की?
PMO से क्या मांगा गया है?
शिकायत में प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग की गई है कि:
- स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाए,
- भूमि रिकॉर्ड, निर्माण अनुमति और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा हो,
- उल्लंघन पाए जाने पर कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए,
- दोषी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए।
यह समाचार उपलब्ध शिकायत पत्र एवं संलग्न दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।











