कलेक्टर साहब अब क्या द्वारका बाबू के आंदोलन करने के बाद ही कारवाई करेंगे? अंबिकापुर में आवंटन निरस्त होने के बाद भी अस्पताल का संचालन जारी

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By Raj RathorePublished On: March 31, 2026
Sanjeevani Multispeciality Hospital Ambikapur

Sanjeevani Multispeciality Hospital : द्वारका आनंद याद है? अरे वो द्वारका बाबू (अमिताभ बच्चन) जिन्होंने फिल्म सत्याग्रह में अंबिकापुर के कलेक्टर की लापरवाही को उजागर करते हुए वहां के लोगों को उनके हक का पैसा दिलवाया था। मुझे आज उनकी बहुत याद आ रही है क्योंकि अंबिकापुर को अब रील नहीं रियल लाइफ में द्वारका बाबू की जरुरत है।

फिल्म में सिस्टम से जवाब मांगने वाला किरदार आज हकीकत में भी नजर आ रहा है। Ambikapur में संजीवनी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा मामला अब कलेक्टर अजीत वसंत की लापरवाही और गंभीर आरोपों के चलते बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। अस्पताल से जुड़े डॉ. अजय गुप्ता पर पूर्व में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे थे। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला और अधिक गंभीर हो सकता है और जांच का दायरा बढ़ सकता है।

जमीन का विवाद क्या है?

शिकायत के अनुसार, ग्राम नमना कला स्थित नजूल प्लॉट क्रमांक 613 (कुल 2.26 एकड़) में से 994.2 वर्गमीटर भूमि के आवंटन के लिए आवेदन किया गया था। उस समय लागू नियमों के तहत आवेदक को 150% प्रीमियम, 2% अतिरिक्त शुल्क, 0.30% वार्षिक सेवा शुल्क के साथ अधोसंरचना और पर्यावरण शुल्क जमा करना था।

हालांकि जुलाई 2024 में शासन ने संबंधित सर्कुलर निरस्त कर दिए। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर ने आवंटन निरस्त करते हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए।
इसके बावजूद आरोप है कि जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया और अस्पताल का संचालन अब भी जारी है।

अस्पताल संचालन से जुड़े नाम

अंबिकापुर के अजबनगर, न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में संचालित इस निजी अस्पताल से जुड़े नामों में डॉ. अजय तिर्की, डॉ. अजय गुप्ता और डॉ. विकास अग्रवाल शामिल बताए जा रहे हैं।

नर्सिंग होम एक्ट उल्लंघन का आरोप

भूमि विवाद के अलावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि अस्पताल को सीमित संख्या में बेड की अनुमति मिली थी, लेकिन वास्तविकता में उससे अधिक बेड संचालित किए जा रहे हैं। यदि जांच में यह सही पाया जाता है, तो यह Chhattisgarh Nursing Home Act के उल्लंघन के दायरे में आएगा।

आदिवासी भूमि और वित्तीय पहलू

शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि संबंधित भूमि आदिवासी समुदाय से जुड़ी हो सकती है, जिसका व्यावसायिक उपयोग नियमों के विपरीत है। इसके अलावा भूमि को गिरवी रखकर ऋण लेने या वित्तीय लाभ उठाने के प्रयास जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

पुराने आरोप भी चर्चा में

अस्पताल से जुड़े डॉ. अजय गुप्ता पर पहले भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल स्पष्ट नहीं है। वहीं, डॉ. अजय तिर्की अंबिकापुर के पूर्व महापौर रह चुके हैं, जिससे मामला राजनीतिक चर्चाओं में भी बना हुआ है।

PMO तक पहुंचा मामला

पूरे प्रकरण को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी गई है, जिसमें स्वतंत्र जांच, भूमि रिकॉर्ड और निर्माण अनुमति की समीक्षा, वित्तीय लेनदेन की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
इससे साफ है कि मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।

कलेक्टर के बयान पर सवाल

मामले में कलेक्टर का बयान सामने आया है कि “लिखित शिकायत मिलने के बाद जांच करवाई जाएगी।” इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासन स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं कर सकता था।

क्या प्रक्रिया की आड़ में देरी?

जब आवंटन निरस्त करने का आदेश पहले से रिकॉर्ड में मौजूद है, मामला सार्वजनिक हो चुका है और शिकायत PMO तक पहुंच चुकी है, तो प्रशासन की ओर से स्वतः जांच शुरू क्यों नहीं की गई—यह अब चर्चा का विषय है।

प्रशासन का कहना है कि औपचारिक जांच के लिए लिखित शिकायत आवश्यक है।
लेकिन दूसरी ओर सवाल यह भी है कि आदेश के बावजूद संचालन जारी रहने की स्थिति में स्वतः निरीक्षण क्यों नहीं किया गया—क्या यह प्रक्रिया का पालन है या कार्रवाई में देरी का कारण?