Crypto Currency: क्रिप्टो करेंसी पर पाबन्दी का सवाल

भारत सरकार सब्सड के शीतकालीन सत्र में विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ ही चर्चित प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Currency) को भी पाबन्द करने का विधेयक लाने वाली है .

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राकेश अचल

भारत सरकार सब्सड के शीतकालीन सत्र में विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ ही चर्चित प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Currency) को भी पाबन्द करने का विधेयक लाने वाली है. दरअसल क्रिप्टो करेंसी देश में भ्रष्टो करेंसी बनती जा रही है. हालाँकि इस समानांतर करेंसी ने आजकल अर्थव्यवस्था में अच्छीखासी सेंध लगा दी है. क्रिप्टो करेंसी अभी बहुत चर्चित नहीं है लेकिन बाजार में इसका दखल लगातार बढ़ता जा रहा है.

क्रिप्टो करेंसी आखिर क्या बला है? क्रिप्टोकरेंसी किसी मुद्रा का एक डिजिटल रूप है. यह पूरी तरह से ऑनलाइन होती है. इसको इसको कोई सरकार या कोई विनियामक अथॉरिटी जारी नहीं करती है. पिछले कुछ सालों से डिजिटल मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है जिन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है. ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं इसलिए उन्हें क्रिप्टोकरेंसी भी कहते हैं. दुनिया भर में मुद्राओं को देश के केंद्रीय बैंक नियंत्रित करते हैं लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के मामले में ऐसा नहीं है, इसका नियंत्रण इसकी ख़रीद-बिक्री करने वाले लोगों के हाथों में सामूहिक तौर पर होता है. भारत समेत ज़्यादातर देशों की सरकारें या तो इन्हें ग़ैर-कानूनी मानती हैं या इन्हें किसी न किसी रूप में नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं.

कहा जाता है की चूंकि क्रिप्टो करेंसी पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है इसलिए ये मुद्रा मणि लॉन्ड्रिग के लिए जमकर इस्तेमाल की जा रही है, इससे एक तरफ भ्र्ष्टाचार बढ़ता है वहीं दूसरी तरफ आधिकारिक मुद्रा को भी नुक्सान होता है. भारत में क्रिप्टो करेंसी के नियमन के बारे में अब गंभीरता से विचार ही हो रह है किन्तु चीन ने इसका नियमन कर भी लिया है. चीन ने मनी-लॉड्रिंग के इल्ज़ाम में अब तक क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े 1100 लोगों को गिरफ़्तार किया है. चीन ने डिजिटल करेंसी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इस क्षेत्र में कदम रखा है, चीन ने जो डिजिटल करेंसी शुरू की है उस पर पूरा सरकारी नियंत्रण है. चीनी डिजिटल युआन परंपरागत युआन करेंसी की ही केवल डिजिटल शक्ल है. इसे चीन के कुछ शहरों में प्रयोग के तौर पर पिछले साल लांच किया गया था. अमेरिका भी डिजिटल डॉलर शुरू करने के बारे में विचार कर रहा है. मुमकिन है की भारत भी इस तरह का कोई प्रयोग करे.

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क्रिप्टोकरेंसी और इसके उपयोग की अंतर्निहित तकनीक को बढ़ावा देने” के लिए कुछ अपवादों को छोड़कर, भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार द्वारा संसद में एक विधेयक पेश करने की खबर के बाद क्रिप्टो बाजार धरशायी हो गया. 23 नवंबर को रात 11:15 बजे तक सभी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 15 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट देखी गई. भारत में बिटकॉइन, एथेरियम और टीथरनाम से क्रिप्टो करेंसी प्रचलन में हैं. बिटकॉइन में 17 फीसदी से अधिक, एथेरियम में लगभग 15 प्रतिशत और टीथर में लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट आई.

29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2021 का क्रिप्टोकरेंसी और विनियमन, आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जाना है. विधेयक के जरिए कुछ अपवादों के साथ भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित किया जाएगा. सरकार का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपनी खुद की डिजिटल करेंसी जारी करेगा. इसका उद्देश्य है, “भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के निर्माण के लिए एक सुविधाजनक ढांचा तैयार करना.”

आपको बता दें की पिछले दिनों में डिजिटल मुद्राओं के नियमन पर चर्चा करने के लिए सरकार ने सभी हितधारकों के साथ कई बैठकें की हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर विभिन्न मंत्रालयों और आरबीआई के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की है. निवेशकों के पैसे की सुरक्षा, निवेश क्षमता और जोखिमों के बारे में मीडिया में भ्रामक विज्ञापन लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं.

विवादित क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने वाला एल साल्वाडोर एकमात्र देश है. भारत में इसे लेकर चिंताएं लगातार जताई जाती रहीं हैं. भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने भी कमजोर खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए भारत में क्रिप्टोकरेंसी के अनियंत्रित विकास के बारे में चिंता व्यक्त की है. गत दिनों क्रिप्टो फाइनेंस के “अवसरों और चुनौतियों” पर चर्चा करने के लिए जयंत सिन्हा की अध्यक्षता में डिजिटल मुद्राओं पर वित्त पर पहली स्थायी समिति इस आम सहमति पर पहुंच गई थी कि क्रिप्टोकरेंसी को रोका नहीं जा सकता है लेकिन इसे विनियमित किया जाना चाहिए. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 नवंबर को सिडनी डायलॉग में मुख्य भाषण देते हुए सभी देशों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि क्रिप्टोकरेंसी “गलत हाथों में समाप्त न हो.”

गौरतलब है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी के 1.5 से 2 करोड़ उपयोगकर्ता है। इस बिल के कानून बनने से ये सभी इस नए कानून से प्रभावित हो सकते है। हालांकि क्रिप्टो करेंसी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ ढील भी दे सकती है। ढील वाली कौन सी क्रिप्टोकरेंसी होंगी ये अभी साफ नहीं है। वहीं बिल की मदद से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अपनी आधिकारिक डिजिटल करेंसी जारी करने के लिए सुविधाजनक फ्रेमवर्क मिलेगा।रिजर्व बैंक से डिजिटल करेंसी आपको मिलेगी और आप जिसे पेमेंट या ट्रांसफर करेंगे, उसके पास पहुंच जाएगी। न तो किसी वॉलेट में जाएगी और न ही बैंक अकाउंट में। बिल्कुल कैश की तरह काम करेगी, पर होगी डिजिटल।

भारत और चीन जैसे देश क्रिप्टो करेंसी का शुरू से विरोध करते हैं। भारत में तो रिजर्व बैंक ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा था। पर अमेरिका समेत कई देश इसके अनुकूल योजनाएं बना रहे हैं। सेंट्रल अमेरिका के अल सल्वाडोर की कांग्रेस ने 8 जून 2021 को बिटकॉइन कानून पास किया और यह छोटा देश बिटकॉइन को लीगल टेंडर बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।उसकी देखा-देखी, कई दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीकी देश भी बिटकॉइन को लीगल स्टेटस देने पर विचार कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देश भी क्रिप्टो करेंसी और एक्सचेंज को नियंत्रित करने के लिए कानूनी ढांचा बनाने पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर क्रिप्टो फ्रेंडली मियामी, [यूएस] ने हाल ही में क्रिप्टो एनक्लेव का आयोजन किया। पूरी दुनिया में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी को अपनाने के प्रयास हो रहे हैं। कुछ देशों ने बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टो करेंसी पर आधारित म्यूचुअल फंड भी लॉन्च किए हैं।