Ambassador की वापसी की चर्चा तेज, उत्तरपारा में फिर शुरू हो सकता है ऑटो मैन्युफैक्चरिंग

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By EditorPublished On: September 24, 2026

कलकत्ता

हिंदुस्तान मोटर्स व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में वापसी करने की तैयारी में है. एक वक्त था जब हिंदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर का भारतीय बाजार में दबदबा था. ये कार 'पावर' की पहचान हुआ करती थी. कोई बड़ा नेता हो या फिर किसी महकमे का बड़ा अधिकारी एंबेसडर ही उनकी सवारी हुआ करती थी. लेकिन वक्त के साथ इस कार की रफ्तार थम गई।  

अब ऐसी चर्चाएं हैं कि कंपनी इस कार को वापस मार्केट में उतारने की तैयारी में जुटी हुई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी पश्चिम बंगाल के उत्तरपारा में व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत करना चाहती है. इस बार कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक व्हीकल पर होगा। 

सीकेए बिरला ग्रुप ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क भी किया है. इस संबंध में राज्य सरकार ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है. हिंदुस्तान मोटर्स ने 2014 में अपने ऑपरेशन को बंद कर दिया था. वहीं पश्चिम बंगाल के पास लगभग दो दशक बाद ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम में वापसी करने का एक और मौका होगा। 

जॉइंट वेंचर में होगा प्लांट
2008 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के सिंगूर से बाहर होने के बाद राज्य को ऑटोमोबाइल सेक्टर से कोई बड़ा निवेश मिला नहीं है. वहीं सीकेए बिरला ग्रुप अभी भी ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री में बना हुआ है. रिपोर्ट्स की मानें तो हिंदुस्तान मोटर्स का ये ईवी प्लांट किसी अमेरिकी या यूरोपियन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर हो सकता है। 

इस खबर के आने के बाद एंबेसडर की वापसी की चर्चा होने लगी है. हालांकि, ये चर्चा ही है फिलहाल. इस संबंध में कोई भी ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. एंबेसडर की वापसी मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि हिंदुस्तान मोटर्स के पास इस नाम को इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। 

क्यों मुश्किल है एंबेसडर की वापसीय़
2017 में हिंदुस्तान मोटर्स ने 80 करोड़ रुपये में इस नाम का ट्रेडमार्क प्यूजो (Peugeot SA) ग्रुप को बेच दिया था. इसका मतलब है कि हिंदुस्तान मोटर्स सीधे इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. सोशल मीडिया पर आपको एंबेसडर ईवी के कई रेंडर दिख जाएंगे. लेकिन इनमें से कोई भी असली नहीं है. अगर हिंदुस्तान मोटर्स ऑटोमोबाइल सेक्टर में वापसी करता भी है, तो इसका नाम एंबेसडर नहीं होगा। 

वैसे ये पहला मौका नहीं है जब हिंदुस्तान मोटर्स ने इसकी शुरुआत की है. इससे पहले भी कंपनी ने एक यूरोपियन कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था. लेकिन कंपनी को उत्तरपारा में प्रोडक्शन शुरू करने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद वो मामला ठंडा पड़ गया था।