राजस्थान में कॉलेजों की गुणवत्ता सुधारने की तैयारी, प्राचार्यों से हर महीने संवाद और रोजगार मेलों पर जोर

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By EditorPublished On: October 29, 2026

जयपुर
 मुख्यमंत्रीभजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन और निर्देश पर राज्य की सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता, कौशल विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में मुख्य सचिववी. श्रीनिवास ने गुरुवार को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों से संवाद किया। इस दौरान एसपीसीजी कॉलेज अजमेर, राजकीय महाविद्यालय कोटा, एसबीआरएम राजकीय महाविद्यालय नागौर, राजकीय डूंगर महाविद्यालय बीकानेर, राज ऋषि राजकीय महाविद्यालय अलवर, एमएसजे राजकीय महाविद्यालय भरतपुर, राजकीय महाविद्यालय सिरोही, महाराणा प्रताप पीजी राजकीय महाविद्यालय चित्तौड़गढ़, मीरा गर्ल्स कॉलेज उदयपुर, राजकीय लोहिया महाविद्यालय चुरू के प्राचार्यों ने अपने-अपने महाविद्यालयों के संबंध में प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, कक्षाकक्षों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं, नवाचारों एवं उपलब्धियों की जानकारी से मुख्य सचिव को अवगत कराया।

श्री वी. श्रीनिवास ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 669 राजकीय महाविद्यालयों की मासिक प्रदर्शन रैंकिंग जारी करने के लिए ग्रेडिंग सिस्टम तैयार करें। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले महाविद्यालयों को प्रोत्साहित किया जाए।

महाविद्यालयों के बीच संवाद और नवाचारों का आदान-प्रदान हो
मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक माह कम से कम पांच राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों से संवाद करें। साथ ही प्रदेश के सभी 669 राजकीय महाविद्यालयों के बीच नियमित संवाद का प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए, जिससे संस्थान एक-दूसरे की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों, नवाचारों और उपलब्धियों को आपस में साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि राजस्थान के अनेक राजकीय महाविद्यालयों की विरासत 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी है। इन संस्थानों के गौरवशाली इतिहास और उपलब्धियों को संरक्षित करने के लिए उनके इतिहास का दस्तावेजीकरण किया जाए तथा स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया जाएं।

विद्यार्थियों के भविष्य और रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष ध्यान दें
श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को केंद्र में रखकर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर और बाजार की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं तथा कौशल विकास से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ-साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों का भी उत्साहवर्धन किया जाना चाहिए, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में उत्कृष्टता और नवाचार की संस्कृति विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को माय भारत पोर्टल से जोड़े, युवा ही विकसित भारत और विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वेबसाइट पर उपलब्ध हों सभी आवश्यक जानकारियां
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी राजकीय महाविद्यालयों की वेबसाइट सुव्यवस्थित और नियमित रूप से अपडेट रखी जाएं। वेबसाइट पर शोध प्रकाशनों के लिंक सहित संस्थान से संबंधित सभी आवश्यक एवं नवीनतम जानकारियां उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और आमजन को उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके।

उन्होंने महाविद्यालय स्तर पर भी रोजगार मेलों के आयोजन के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि जिन महाविद्यालयों की नैक (NAAC) रेटिंग 'बी' है, उन्हें 'ए' ग्रेड तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।

छात्रावासों के रखरखाव और पुस्तकालयों के डिजिटलीकरण पर जोर
मुख्य सचिव ने राजकीय महाविद्यालयों के छात्रावासों के समुचित रखरखाव और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए, ताकि वहां उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने पुस्तकालयों के डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना और प्रत्येक महाविद्यालय को तकनीकी रूप से सक्षम करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं।

इस दौरान उच्च शिक्षा विभाग के अतरिक्त मुख्य सचिवकुलदीप रांका, कॉलेज एजुकेशन आयुक्तनथमल डिडेल सहित सम्बंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य, अधिकारी उपस्थित रहें और विडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े।