इंदौर में करवा चौथ पर 8:34 बजे निकलेगा चांद, मध्यप्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली में 8:01 बजे नजर आएगा

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By Raj RathorePublished On: October 28, 2026

करवा चौथ पर गुरुवार, 29 अक्टूबर को महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखेंगी। रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाएगा।

हालांकि, इस बार चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से मध्य प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में बारिश की संभावना है। ऐसे में महिलाओं को चांद के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

खगोलीय गणनाओं के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली में रात 8:01 बजे चंद्रमा दिखाई देने का अनुमान है, जबकि सबसे देर से आलीराजपुर में रात 8:41 बजे चंद्रोदय होगा। भोपाल में रात 8:26 बजे और इंदौर में रात 8:34 बजे चांद दिखने का अनुमान है।

MP में कहां कितने बजे दिखेगा चांद?

नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के मुताबिक, मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी जिलों के बीच चंद्रोदय के समय में करीब 40 मिनट का अंतर रहेगा।

  • भोपाल – रात 8:26 बजे
  • इंदौर – रात 8:34 बजे
  • उज्जैन – रात 8:33 बजे
  • जबलपुर – रात 8:16 बजे
  • ग्वालियर – रात 8:15 बजे
  • नर्मदापुरम – रात 8:26 बजे
  • छिंदवाड़ा – रात 8:23 बजे
  • रीवा – रात 8:06 बजे
  • सतना – रात 8:08 बजे
  • सागर – रात 8:19 बजे

ये समय चंद्रमा के क्षितिज से उदित होने के अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक चंद्र दर्शन स्थानीय मौसम और आसपास की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेंगे।

चक्रवात के असर से कहां होगी बारिश?

करवा चौथ के दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का अनुमान है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग में बादल छाए रह सकते हैं।

सारिका घारू के अनुसार, चंद्रमा के उदय का समय अलग-अलग जिलों की भौगोलिक स्थिति के कारण बदलता है। मध्य प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित जिलों में चांद पहले दिखाई देता है, जबकि पश्चिमी जिलों में इसके दर्शन के लिए अधिक इंतजार करना पड़ता है।

बादल रहे तो 10 से 15 मिनट तक बढ़ सकता है इंतजार

सारिका घारू ने बताया कि चंद्रोदय का समय वह होता है, जब चंद्रमा क्षितिज से ऊपर उठता है। लेकिन ऊंची इमारतों, पहाड़ियों, बादलों या कोहरे के कारण चांद आंखों से दिखाई देने में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है।

यदि निर्धारित समय पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

सरगी से शुरू होगा करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ पर व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं। यह परंपरा आमतौर पर सास की ओर से बहू को सरगी देने से जुड़ी है। इसमें फल, मिठाई, मेवे और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं।

दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुबह संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना उपयोगी हो सकता है। फल, मेवे और पर्याप्त तरल पदार्थ व्रत से पहले शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं।

चंद्र दर्शन और पूजा के बाद खोला जाता है व्रत

करवा चौथ पर महिलाएं गणेश जी, करवा चौथ माता और चंद्र देव की पूजा करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत खोलने की परंपरा है। इस अवसर पर करवा चौथ की कथा सुनने या पढ़ने का भी विशेष महत्व माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में सावित्री-सत्यवान और द्रौपदी-अर्जुन से जुड़ी कथाओं को भी पति की लंबी उम्र और मंगलकामना के संदर्भ में याद किया जाता है।

ध्यान दें: चंद्र दर्शन का वास्तविक समय आपके शहर और स्थानीय मौसम के अनुसार बदल सकता है। बादल छाए रहने पर चांद निर्धारित समय के बाद दिखाई दे सकता है।