Indore Water Crisis: कम बारिश और अल नीनो का असर, इंदौर में बोरिंग पर सख्ती; कलेक्टर ने जारी किए आदेश

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By EditorPublished On: October 28, 2026

इंदौर 
 मध्य प्रदेश में कम बारिश का असर अब तेजी से दिखने लगा है. वर्षों से ग्राउंड वॉटर लेवल की समस्या से जूझ रहे इंदौर के हालात बिगड़ने लगे हैं. इंदौर में सामान्य से बहुत कम बारिश के कारण पूरे जिले में अभी से सूखे जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं. स्थिति को भांपते हुए इंदौर जिला प्रशासन ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र समेत पूरे जिले को जल संकटग्रस्त घोषित कर दिया है, जहां अब नई बोरिंग खोदना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

इंदौर जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित
दरअसल, इंदौर जिले में औसत से काफी कम वर्षा होने और भू-जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन के कारण पेयजल स्रोतों एवं नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है. आगामी समय में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर व जिला दण्डाधिकारी शिवम वर्मा ने इंदौर जिले के संपूर्ण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है. साथ ही, मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 व संशोधन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत जिले में अशासकीय और निजी नलकूप खनन पर आज से आगामी आदेश तक प्रतिबंध लगाया है। 

कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (जल प्रदाय), नगर पालिक निगम इंदौर एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (ग्रामीण), जिला इंदौर द्वारा गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई थी। 

बोरिंग करने पर जब्त होगी मशीन
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक, '' जिले में प्रतिबंधित स्थानों पर अवैध रूप से प्रवेश करने वाली अथवा नलकूप खनन और बोरिंग का प्रयास करने वाली मशीनों को भी जब्त किया जाएगा. संबंधित राजस्व, पुलिस व नगर निगम अधिकारियों को मशीनें जब्त करने और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कराने का अधिकार दिया गया है। 

उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ दो साल की जेल
आदेश के मुताबिक, '' मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 2,000 रु तक के जुर्माने, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है. शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप उत्खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा. वहीं, आवश्यकता पड़ने पर निजी जलकूपों और निजी जल स्रोतों का सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत अधिग्रहण किया जा सकता है. यह आदेश तत्काल प्रभावशील रहेगा।