मानसा.
एंटी ड्रग टास्क फोर्स के नेता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा परिवार को आश्वासन दिए जाने के बाद, मंगलवार देर रात करीब बारह बजे CBI की टीम थाना सिटी-2 पहुंच गई। गृह मंत्री के दौरे के महज आठ घंटे के भीतर ही जांच एजेंसी के सक्रिय होने से मामले में तेजी आ गई है।
CBI की टीम का नेतृत्व वरिष्ठ DIG कर रहे हैं। बुधवार को सीबीआइ की टीम ने मृतक के परिवार से मुलाकात की और उनके बयान लिए। जांच में फारेंसिक विशेषज्ञों, ड्रग कंट्रोलर्स और अन्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। यह विशेषज्ञ घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की जांच करेंगे, ताकि हत्या से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जा सके। मृतक परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम अभी तक नहीं हुआ है। न अभी तक शव का अंतिम संस्कार किया गया है। सीबीआई अधिकारियों की एक टीम हत्या के सभी पहलुओं की जांच के लिए पंजाब पहुंच चुकी है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को घोषणा की थी कि घटना की जांच सीबीआई से कराई जाएगी।
सीएम मान ने CBI को सौंपी थी मामले की जांच
सीएम मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, ''हम मादक पदार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले परविंदर सिंह झोटा के पिता और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए हम इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप रहे हैं। मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ हमारी जंग पूरी ताकत से जारी है। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें जो भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, हम उनसे पीछे नहीं हटेंगे।''
13 अक्टूबर को दुकान के अंदर हुई थी हत्या
झोटा के परिजन इस हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे थे। झोटा दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित दवा की दुकान के भीतर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
आरोपी को सालासार से लिया गया हिरासत में
झोटा की हत्या के मामले में दुकान मालिक अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया गया। कुमार पर आरोप है कि जब झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचने को लेकर उससे सवाल किया, तो उसने झोटा पर गोली चला दी।
7 दिन बाद भी नहीं हो सका अंतिम संस्कार
इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के सात दिन बाद भी उनके शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। उनके परिजन एवं समर्थक इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे।









