इंदौर में झोलाछाप डॉक्टरों पर दर्ज हुई एफआईआर, दवाओं के हेवी डोज से हुई थी बच्ची की मौत

Author Picture
By Raj RathorePublished On: October 15, 2026

इंदौर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र में 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में पुलिस ने हर्ष क्लीनिक के संचालक श्रीचंद बागेजा और डॉक्टर ज्ञान एस. पंजवानी के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।

आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लीनिक सील किए जाने के बावजूद उसे दोबारा खोलकर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। बुखार और खांसी की शिकायत पर परिजन बच्ची को यहां लेकर पहुंचे थे। इलाज के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और एमवाय अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

बुखार-खांसी होने पर हर्ष क्लीनिक लेकर पहुंचे थे परिजन

पुलिस के अनुसार, खंडवा नाका क्षेत्र में गणेश नगर फोर्स एकेडमी के पास रहने वाले मनोज सोलंकी की 10 वर्षीय बेटी दिव्यांशी को बुखार और खांसी की शिकायत थी। 30 अगस्त को परिजन उसे खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लीनिक लेकर पहुंचे थे।

आरोप है कि क्लीनिक संचालक श्रीचंद बागेजा और डॉक्टर ज्ञान एस. पंजवानी के पास शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में इलाज करने और एलोपैथिक चिकित्सा के लिए आवश्यक मान्य मेडिकल डिग्रियां नहीं थीं। इसके बावजूद बच्ची का इलाज किया गया और उसे एलोपैथिक दवाएं दी गईं।

इलाज के दौरान बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मृत घोषित

क्लीनिक में इलाज के दौरान दिव्यांशी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद 30 अगस्त की रात उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

बच्ची की मौत के बाद मामले की जांच शुरू हुई। पुलिस ने इलाज से जुड़े घटनाक्रम और क्लीनिक के संचालन की परिस्थितियों की पड़ताल की।

स्वास्थ्य विभाग पहले ही कर चुका था क्लीनिक सील

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग ने हर्ष क्लीनिक को पहले ही सील कर दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद क्लीनिक का ताला खोलकर दोबारा मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया।

सील होने के बाद क्लीनिक दोबारा कैसे संचालित हुआ और वहां बच्ची का इलाज किन परिस्थितियों में किया गया, इन पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।

दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज

टीआई अनिल कुमार गुप्ता की जांच और शिकायत के आधार पर जूनी इंदौर पुलिस ने श्रीचंद बागेजा और डॉक्टर ज्ञान एस. पंजवानी के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम और चिकित्सा शिक्षा संस्था नियंत्रण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की है।

पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और इलाज के तथ्यों की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि और बच्ची की मौत से जुड़े सभी पहलुओं का निर्धारण जांच के आधार पर होगा।