राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट, बालोतरा में तेजी से सूख रहे पेड़; जांच की मांग तेज

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By EditorPublished On: October 15, 2026

बाड़मेर
 थार की जीवनरेखा और राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट मंडराने लगा है। बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुम्पलिया के राजस्व गांव चौधरी भूनारामजी गोदारा नगर में हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। पेड़ों के तनों और जड़ों के आसपास जमीन पर चूने या पत्थर जैसी कठोर सफेद परत जम रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में लगी करीब 50 से अधिक खेजड़ी इससे प्रभावित हुई है, वहीं अन्य पेड़ों में भी ऐसे लक्षण दिख रहे है। कुम्पलिया के पूर्व पंच रणधीर सिंह गोदारा पेड़ों को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने समस्या की जांच और स्थायी समाधान के लिए प्रशासन से मांग की है।

पर्यावरण को नुकसान की आशंका
खेजड़ी अकाल में पशुओं को लूंग के रूप में चारा देती है। इसकी सांगरी पौष्टिक सब्जी है और पेड़ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित और स्वस्थ पेड़ों की मिट्टी, सिंचाई के पानी और जड़ों की जांच जरूरी है। कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर वास्तविक कारणों का पता लगा सकती है।

खाद-कीटनाशकों से किए उपचार सफल नहीं
रणधीर सिंह गोदारा के अनुसार, जड़ों के आसपास फफूंद जैसी सफेद परत बन रही है। इससे जड़ों की नमी और पोषक तत्व प्रभावित होने तथा जड़ सड़न की आशंका है। पानी, खाद और कीटनाशकों से किए गए शुरुआती उपचार सफल नहीं हुए। हालांकि, समस्या का वास्तविक कारण अभी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। मिट्टी में लवणों का जमाव, अधिक क्षारीयता, सोडियम की अधिकता, खराब जल निकास या जड़ों से जुड़े रोग संभावित कारण हो सकते हैं। जिला परिषद सदस्य दौलताराम गोदारा ने कलक्टर को पत्र लिखकर विशेषज्ञों की टीम भेजने और वैज्ञानिक उपचार कराने की मांग की है।

खेजड़ी को बचाने के लिए पेड़ के साथ जड़ों के आसपास की मिट्टी को भी स्वस्थ बनाना होगा। मिट्टी, पानी और जड़ों की वैज्ञानिक जांच से सही कारण पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सकता है।
– डॉ. कृष्णा सहारण, कृषि विशेषज्ञ एवं सहायक आचार्य, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

खेजड़ी का एक पौधा तैयार करने में वर्षों की मेहनत लगती है। प्रशासन को तत्काल अनुसंधान और आवश्यक उपचार के कदम उठाने चाहिए, ताकि जीवनदायिनी वृक्षों को बचाया जा सके।
-दौलताराम गोदारा, जिला परिषद सदस्य