पासी समाज को लेकर भाजपा की नई रणनीति, विनोद तावड़े करेंगे जनप्रतिनिधियों से चर्चा

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By EditorPublished On: October 13, 2026

 लखनऊ
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने जातीय समीकरण की हर कड़ी मजबूत करने में जुटी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराजगी और पासी समाज की बेचैनी दूर करने के लिए भाजपा ने गियर बदला है।

प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने मुख्यालय पर 14 अक्टूबर को पासी समाज के जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की बैठक बुलाया था, जिसे फिलहाल टाला गया है। बैठक अगले सप्ताह बुलाई जाएगी।

अनुसूचित वर्ग में जाटव के बाद सबसे बड़ी आबादी पासी समाज की है। अवध, गोरखपुर, कानपुर एवं काशी क्षेत्र में इनकी बड़ी आबादी है। भाजपाइयों का कहना है कि यह समाज प्रदेश की 85 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है, जबकि डेढ़ सौ सीटों पर असर रखता है।

पार्टी ने हाल में भले ही प्रियंका रावत को राज्य सभा भेजकर पासी समाज में पैठ बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन कौशल किशोर की नाराजगी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले दिनों भाजपा ने कृष्णा पासवान को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया।

प्रदेश संगठन में अशोक रावत, उपेंद्र रावत एवं प्रियंका रावत को शामिल किया। भाजपा के पास जयप्रकाश रावत, अशोक रावत एवं कमलेश पासवान के रूप में तीन, जबकि सपा के पास आरके चौधरी, प्रिया सरोज, दारोगा प्रसाद सरोज, पुष्पेंद्र सरोज एवं अवधेश प्रसाद के रूप में पासी समाज के पांच सांसद हैं।

फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के जरिए सपा बड़ा राजनीतिक संदेश दे रही है। सपा ने इंद्रजीत सरोज, आरके चौधरी, पुष्पेंद्र सरोज व प्रिया सरोज को सक्रिय कर दिया है।

भाजपा ने 2014, 2027, 2019 एवं 2022 के चुनाव में गैर जाटव दलित राजनीति का सफल प्रयोग किया, लेकिन 2024 में सपा के पीडीए ने भाजपा के सामने खतरे की घंटी बजा दी। अब भाजपा एक बार फिर पासी समाज से अपने संबंधों के तार कसने में जुटी है।