चीन-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी के बीच रूस ने भारत को बताया पुराना और भरोसेमंद साझेदार

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By EditorPublished On: October 5, 2026

मॉस्को
 रूसी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को भारत-रूस संबंधों पर बयान जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि रूस और भारत ने अपने संबंधों को "खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक पहुंचा दिया है। यह बयान तब आया है, जब रूस की चीन और पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ रही हैं। चीन के साथ रूस के आर्थिक और सैन्य संबंध अपने चरम पर हैं। वहीं, पाकिस्तान के साथ भी रूस की गलबहियां बढ़ रही हैं। पाकिस्तान लगातार रूस की तारीफ कर रहा है और मॉस्को के करीब जाने की कोशिश में है। ऐसे में रूस की तरफ से भारत के साथ संबंधों पर बयान आना महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

रूस ने भारत संग संबंधों की तारीफ की
मंत्रालय ने टेलीग्राम पर कहा, "3 अक्टूबर, 2000 को रूस और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी पर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे… तब से, रूस-भारत सहयोग और भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है – यानी खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर।" बयान में कहा गया है कि इस दस्तावेज पर 2 से 5 अक्टूबर, 2000 तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। मंत्रालय ने कहा, "भारत रूस का एक पुराना और भरोसेमंद साझेदार है। दशकों से, हमारे देशों के बीच भरोसे पर आधारित दोस्ताना संबंध रहे हैं।"

वैश्विक मंचों पर बढ़ रहा भारत-रूस सहयोग
मंत्रालय ने आगे कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण की वकालत करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों – मुख्य रूप से G20, UN, BRICS और SCO – पर सहयोग बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय ने 5 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली में रूस-भारत बातचीत के बाद पुतिन की उन टिप्पणियों को भी याद किया, जिनमें कहा गया था कि रूस और भारत स्वतंत्र और स्वायत्त विदेश नीतियां अपनाते हैं।

भारत-रूस संबंध महत्वपूर्ण क्यों?
भारत-रूस संबंध ऐतिहासिक हैं। दोनों देशों ने मुश्किल वक्त में भी एक दूसरे का साथ दिया है। वर्तमान में भी भारत और रूस के आर्थिक और सैन्य संबंध काफी प्रगाढ़ हैं। अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद रूस, भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। वहीं, हथियारों के मामले में भी वह अब भी भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है। भारत और रूस वर्ष 2030 तक अपने आर्थिक संबंधों को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। दोनों देश अंतरिक्ष, कृषि, व्यापार, फार्मास्यूटिकल्स, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक साथ काम कर रहे हैं।