इंदौर
इंदौर से रेल रूट से बुदनी और नर्मदापुरम की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा में समय भी बचेगा। बुदनी रेलवे स्टेशन आने वो समय में जंक्शन के रूप में लेने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इटारसी और भोपाल के बीच यह बड़ा जंक्शन होगा।
बुदनी स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही इससे यात्रा में लगने वाला लंबा समय भी कम होगा। इस स्टेशन पर पहले कुछ ट्रेनों का स्टॉपेज था, अब जंक्शन बनने के बाद इसमें कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहेगा। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
बुदनी रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगी। जिस रेलवे स्टेशन पर तीन दिशाओं की ओर से ट्रेन आती है उसे जंक्शन कहा जाता है। ऐसे में आने वाले समय में बुदनी रेलवे स्टेशन भोपाल और इटारसी के बीच महत्वपूर्ण रहेगा।
सलकनपुर मार्ग से जुड़ेगा जुड़ेगा क्षेत्र
बुदनी रेलवे स्टेशन के जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिलेगी। इसके साथ ही सलकनपुर मार्ग भी इससे जुड़ जाएगा। इस नए रूट के बनने से अब ट्रेनों को भोपाल घूमकर नहीं जाना होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा।
पहले इस रेलवे स्टेशन कुछ गाड़ियों का हाल्ट था। लेकिन जंक्शन बनने से नई ट्रेमें रुकने के रास्ते खुल गए हैं। नई बिल्डिंग नए स्ट्रक्चर का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां पर पहले से बनी रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग अभी भी है। जंक्शन बनने के साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाली नई बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से जारी है।
बढ़ते भारत के लिए एक नया रेल गलियारा
भोपाल-इटारसी कॉरिडोर पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, और मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य के केंद्रीय और पूर्वी भागों से संपर्क के लिए लगभग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है। इंदौर-बुदनी लाइन एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे नेटवर्क की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर भीड़भाड़ कम होगी।
एक बार चालू हो जाने पर, यह कॉरिडोर इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी को लगभग 68 किलोमीटर और यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई के लिए एक तेज और अधिक कुशल संपर्क उपलब्ध होगा।
इससे इंदौर, देवास और सीहोर जिलों के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा, जिनमें से कई पारंपरिक रूप से रेल नेटवर्क से बाहर रहे हैं।
बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग
यह मध्य भारत में चल रही सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इस कॉरिडोर को लेवल-क्रॉसिंग-मुक्त रेलवे लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा और दक्षता में काफी सुधार होगा।
इसका पैमाना निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे में परिलक्षित होता है:
• 80 महत्वपूर्ण पुल
• 96 छोटे पुल
• 139 सड़क अंडरब्रिज (आरयूबी)।
• 5 सड़क ओवरब्रिज (आरओबी)
• 18 स्टेशन: 3 ठहराव स्टेशन, 15 क्रॉसिंग स्टेशन
• 10.6 किमी से अधिक की कुल लंबाई वाले 3 पुल
• लगभग 10 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 2 रेलवे सुरंगें
दूरी कम होगी
नया जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिल जाएगी। इससे अनकनेक्टेट सलकनपुर मार्ग के क्षेत्र जुड़ जाएंगे। साथ ही भोपाल की अपेक्षा नये रूट से जाने पर दूरी कम होगी और समय भी बचेगा। -नवल अग्रवाल, पीआरओ रेलवे









