बिहार में जून महीने में 50.28 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन, ₹70 हजार करोड़ से ज्यादा का भुगतान

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By EditorPublished On: September 18, 2026

 पटना
 बिहार(Bihar News) के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक डिजिटल लेनदेन( Bihar UPI Transaction) का चलन तेजी से बढ़ा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के दौरान राज्य में यूपीआई (UPI) के माध्यम से लगभग ₹70,130.89 करोड़ का डिजिटल भुगतान दर्ज किया गया।

आंकड़ों की जुबानी बिहार का डिजिटल सफर
जून 2026 में बिहार में करीब 50.28 करोड़ डिजिटल भुगतान हुए। इस दौरान यूपीआई के जरिए कुल ₹70,130.89 करोड़ का हस्तांतरण हुआ।

प्रति ट्रांजैक्शन औसतन ₹1,395 का भुगतान हुआ, जो यह साबित करता है कि आम लोग किराना दुकान, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश के कुल यूपीआई वॉल्यूम में बिहार की हिस्सेदारी 2.21% और कुल वैल्यू में 2.42% रही।

MDR चार्ज का प्रस्ताव और बढ़ता विवाद
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब एक नई चुनौती सामने खड़ी हो रही है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस फीस के लागू होने की खबर से छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।

क्या दोबारा बढ़ेगा कैश का चलन?
छोटे दुकानदारों का मानना है कि पहले से ही कम मार्जिन पर काम करने के बाद अतिरिक्त 0.4% का शुल्क उनकी कमाई को प्रभावित करेगा। यदि यह चार्ज व्यापारियों पर डाला गया, तो वे ग्राहकों से डिजिटल के बजाय नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं। वहीं ग्राहकों को भी यह डर है कि व्यापारी इस शुल्क की भरपाई के लिए सामान के दाम बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर MDR शुल्क अनिवार्य किया गया, तो बिहार के ग्रामीण और छोटे शहरी इलाकों में लोग एक बार फिर कैश की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन की रफ्तार धीमी हो सकती है।