कैथल
प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है।
प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं।
इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र
पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है।
इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी
पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है।
पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है।
जानिये, जिलों की स्थिति
सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं।
असली मालिकों के नाम गायब
कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं।
पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।









