झारखंड के युवाओं को राज्य में ही तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए एचटीआई के पुनरुद्धार का प्रस्ताव तैयार

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By EditorPublished On: September 15, 2026

 रांची
झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी को देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यहां दोबारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण शुरू कराया जा सके। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा।

बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एचईसी प्रबंधन नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से एचटीआई की संबद्धता फिर से बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद संस्थान को नए स्वरूप में संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जायेगा। इससे लंबे समय से बंद पड़े एचटीआई में फिर से तकनीकी प्रशिक्षण की राह खुल सकती है।

युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में
एचटीआई के दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के युवाओं को मिलेगा। फिलहाल औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य के कई युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। एचटीआई में प्रशिक्षण शुरू होने पर उन्हें अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।

प्रबंधन का मानना है कि संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर कुशल तकनीशियन तैयार किए जा सकते हैं। इससे युवाओं के लिए एचईसी समेत राज्य और देश की औद्योगिक कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी काम मिल सकता है।

पांच ट्रेड में हर साल 200 युवाओं को मिलता था प्रशिक्षण
एचटीआई में पहले आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट दो वर्षीय, जबकि कोपा और वेल्डर एक वर्षीय ट्रेड थे। दो शिफ्ट में संचालित प्रशिक्षण में पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था।

यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में काम करने की भी जानकारी है। ऐसे में संस्थान के पुन: शुरू होने से राज्य में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

2022-23 से बंद है नया नामांकन
एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में एचटीआई का संचालन प्रभावित हुआ। वर्ष 2022-23 से यहां नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की।

बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह सभी पांच ट्रेड बंद हो गए। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात हैं।

150 से अधिक मशीनें, चोरी से बढ़ी चिंता
लंबे समय से बंद संस्थान में उपकरणों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान का ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरणों के साथ लेथ मशीनों के पुर्जे भी चोरी होने की बात सामने आई है।

एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने संस्थान को दोबारा शुरू करने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी होगा। प्रस्तावित निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन शुरू होने पर संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना का उपयोग फिर से प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा।
एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ भुगतान व सेटलमेंट का मामला मंत्रालय पहुंचा

एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मामला अब भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के सीपीएसई-एचईसी से संबंधित अनुभाग ने इस मामले में एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में एचईसी कर्मचारी व श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से भेजे गए छह सितंबर के ई-मेल का उल्लेख किया गया है। ई-मेल में वीपीएफ अंशदान की वापसी तथा कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए हैं।

मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन को अग्रसारित करते हुए मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति एचईसी के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) को भी भेजी गई है। इससे कर्मचारियों के वीपीएफ से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न वित्तीय देनदारियों और सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मंत्रालय की ओर से पत्र भेजे जाने को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब एचईसी प्रबंधन द्वारा मामले की जांच कर वीपीएफ अंशदान की वापसी और संबंधित सेटलमेंट पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।