दाहिनी सूंड वाले गणेश जी का अनोखा मंदिर, जयपुर के नहर वाले गणेश के दर्शन को जुटते हैं श्रद्धालु

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By EditorPublished On: September 15, 2026

देशभर में वैसे तो भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन जयपुर के नहर वाले गणेश मंदिर की खास मान्यता है. यह मंदिर ब्रह्मपुरी क्षेत्र में नाहरगढ़ की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है. मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है. यह देश के उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जहां गणपति जी की दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा विराजमान है. गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं.

सिंजारा उत्सव में सजते हैं बप्पा
जयपुर में नहर वाले गणपति के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंजारा उत्सव मनाया जाता है. इस अवसर पर भगवान गणेश को विशेष पोशाक और साफा अर्पित करने की परंपरा है. इस दौरान मंदिर में असंख्य मोदकों की झांकी सजाई जाती है. मोदकों से सजी यह झांकी भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती है. सिंजारा उत्सव दौरान भगवान गणेश को मेहंदी और सिंदूर भी अर्पित किया जाता है. इसके बाद ये मेहंदी और सिंदूर श्रद्धालुओं में भी बांटा जाता है.

नहर वाले गणेश मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा ने बताया कि मंदिर में सिंदूर और मेहंदी लेने दूर-दूर से भक्तगण यहां आते हैं. मान्यता है कि यहां का सिंदूर और मेहंदी मांगलिक कार्यों में आने वाली समस्याओं को दूर करता है. भगवान गणेश की कृपा से विवाह या प्रेम संबंधों में आ रही अड़चनें यह सिंदूर और मेहंदी रचाने के बाद दूर हो जाती हैं.

मंदिर के महंत ने बताया कि राजस्थान में वैसे तो कई ऐसे मंदिर है, जहां मेहंदी और सिंदूर बांटने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. लेकिन जयपुर के तीन मंदिर इसके लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं. इनमें नहर वाले गणपति के अलावा, मोती डूंगरी गणेश मंदिर और श्री गढ़ गणेश मंदिर शामिल हैं. इन मंदिरों में भी अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए लोग सिंदूर-मेहंदी लेने आते हैं.

दाहिनी ओर सूंड वाले गणपति का रहस्य
पंडित जय शर्मा के अनुसार, गणेश पुराण में कुल तीन तरह के गणपति का वर्णन मिलता है. बाई ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को वाममुखी गणपति कहा जाता है. जबकि दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है जो कि सिद्धिविनायक का स्वरूप माने जाते हैं. यानी भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले वाले गणपति. सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए दक्षिणाभिमुखी गणपति की पूजा सबसे ज्यादा लाभकारी मानी जाती है. धन, वैभव, यश, सफलता की कामना के लिए इन्हीं गणपति की फलदायी होती है. जबकि तंत्र-मंत्र साधना और संत समाज के लिए सीधी सूंड वाले गणपति की पूजा लाभकारी होती है