पटना
अवैध पार्किंग की वजह से राजधानी में लगने वाले ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण को ले अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस तकनीक के मूल में यह है कि वाहन अगर सड़क पर वैसी जगह लगी दिखी, जहां पार्किंग निषिद्ध है, तो तुरंत एक स्वचालित अलर्ट संबंधित इलाके के नियंत्रण कक्ष को चला जाएगा। उक्त इलाके में ट्रैफिक नियंत्रण को तैनात पुलिसकर्मी को तुरंत नियंत्रण कक्ष संपर्क कर इस बारे में जवाब तलब करेगा।
पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी
पटना में पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी रही है। सिटी सर्विस की बसों के लिए मोटी राशि खर्च दो बार आधुनिक बस स्टॉपेज का निर्माण कराया गया, लेकिन इन स्टॉपेज पर बसें कभी नहीं रूकी। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बसें जहां पैसेंजर दिखा वहां रुक जाती हैं। ट्रैफिक के दबाव से उनका कोई मतलब नहीं।
ऑटो व ई रिक्शा चालकों ने अपनी इच्छा से बना लिए हैं स्टॉपेज
पथ निर्माण विभाग ने जब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ राजधानी के जाम को नियंत्रित किए जाने की योजना पर काम आरंभ किया तो यह बात सामने आयी कि ऑटो व ई रिक्शा चालकों की वजह से समस्या अधिक है। इन लोगों ने अपनी इच्छा से शहर के कई जगहों पर स्टॉपेज बना लिया है।
उन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस और यहां तक कि अधिकारियों तक की तैनाती पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़ी समस्या को नियंत्रित करने की योजना पर काम होना है।
यहां तक कि यह भी देखा जाना है कि जिस ट्रैफिक जवान की तैनाती संबंधित इलाके में है वह अपने जगह पर मौजूद है कि नहीं। इसे देखने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है।
हर इलाके की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक
हर इलाके में ट्रैफिक जाम की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक की व्यवस्था की जा रही है। संबंधित इलाके में ट्रैफिक जाम को नियंत्रित किए जाने काे ले पहले ही मैजिस्ट्रेट व डीएसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती है। ट्रैकिंग की रिपोर्ट तुरंत उन्हें दी जाएगी। उन्होंने सूचना पर क्या किया इस पर भी तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।








