7 साल से अटका PU अंडरपास प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ा, ₹8.40 करोड़ की लागत से बनेगा रास्ता

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By EditorPublished On: September 8, 2026

चंडीगढ़

चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा।

पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही
पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया।

अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे।

अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके।

नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान
पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है।

इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है
दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई।

चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन
प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए
प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।