इंदौर में अयोध्या गृह निर्माण संस्था के करोड़ों के फर्जीवाड़े पर कोर्ट सख्त, 145 फ्लैट-9 दुकानों के प्रोजेक्ट में FIR के आदेश

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By Raj RathorePublished On: September 5, 2026

इंदौर। अयोध्या गृह निर्माण सहकारी संस्था में करोड़ों रुपए के कथित फर्जीवाड़े के मामले में जिला कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। संस्था के पदाधिकारियों पर फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए 145 फ्लैट और 9 दुकानों वाली बहुमंजिला इमारत का निर्माण कराने का आरोप है।

मामले में कोर्ट ने एरोड्रम थाना पुलिस को संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश शिकायतकर्ताओं की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 175(3) के तहत प्रस्तुत आवेदन पर सुनवाई के बाद दिया गया।

1989 में 16 सदस्यों ने बनाई थी संस्था

शिकायत के मुताबिक, अयोध्या गृह निर्माण सहकारी संस्था की स्थापना 1989 में 16 संस्थापक सदस्यों ने की थी। संस्था का उद्देश्य सदस्यों को मकान और प्लॉट उपलब्ध कराना था। उस समय सदस्यों से कुल 31,080 रुपए एकत्र कर छोटा बांगड़दा क्षेत्र में करीब 1.48 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई थी।

वर्ष 2007 के मास्टर प्लान में जमीन का उपयोग आवासीय होने के बाद संस्था के सदस्यों को प्लॉट देने का निर्णय लिया गया। आरोप है कि विवाद तब शुरू हुआ, जब 30 दिसंबर 2017 को नई कार्यकारिणी ने संस्था की कमान संभाली।

संस्थापक सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नई कार्यकारिणी ने मूल संस्थापक सदस्यों को जानकारी दिए बिना बहुमंजिला भवन बनाने की योजना तैयार की। इस प्रोजेक्ट में 145 फ्लैट और 9 दुकानें प्रस्तावित की गई थीं।

आरोप है कि सरकारी विभागों से अनुमति लेने के दौरान संस्थापक सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि सहकारिता विभाग की जांच और हस्तलिपि विशेषज्ञ की रिपोर्ट में भी फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि हुई है।

अध्यक्ष के रिश्तेदार से जुड़ी कंपनी को ठेका देने का आरोप

शिकायत में निर्माण कार्य को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि सहकारी संस्था के नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण का ठेका अध्यक्ष के रिश्तेदार से जुड़ी जेएनजे कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया।

शिकायतकर्ताओं ने इसे संस्था की संपत्ति और सदस्यों के हितों के खिलाफ उठाया गया कदम बताया है।

पुलिस में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता मुकेश देवल ने कोर्ट को बताया कि मामले में एरोड्रम पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। यह आरोप भी लगाया गया कि मामले में आवाज उठाने वाले मूल सदस्यों को संस्था से हटाने का प्रयास किया गया।

पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद शिकायतकर्ताओं ने कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया।

इन धाराओं में FIR के निर्देश

कोर्ट ने एरोड्रम थाना पुलिस को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), 316(5), 336(1), 338(1), 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने जांच अधिकारी को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि जांच के दौरान जिस भी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी कड़ी

अब कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस जांच में यह सामने आएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और बहुमंजिला प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने से लेकर फ्लैट और दुकानों के निर्माण व बिक्री तक किन-किन लोगों की भूमिका रही।