इंदौर की Kervi Sharma ने चारधाम यात्रा को बना दिया किताब, 57 पन्नों में समेटी हिमालय से गिरिराज जी तक की कहानी

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By Raj RathorePublished On: September 1, 2026

Kervi Sharma 4 Dham Diaries 2026 : उम्र महज 11वीं कक्षा में पढ़ने की, लेकिन अनुभवों को शब्दों में पिरोने का हुनर किसी मंजे हुए लेखक जैसा। इंदौर के शिशुकुंज स्कूल की छात्रा Kervi Sharma ने अपनी चारधाम यात्रा को एक खूबसूरत यात्रा-वृत्तांत का रूप देते हुए ‘4Dham Diaries 2026’ नाम से किताब तैयार की है।

57 पन्नों की इस किताब में Kervi ने सिर्फ चार धामों के दर्शन और यात्रा का वर्णन नहीं किया, बल्कि हिमालय की खूबसूरती, रास्तों की कठिनाइयों, स्थानीय मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और यात्रा से मिले जीवन के सबक को भी अपने अनुभवों के साथ दर्ज किया है।

Kervi की यह यात्रा इंदौर से शुरू होती है। किताब के पहले अध्याय ‘Platform Number 6’ में वह रात 3 बजे तक चलती पैकिंग से लेकर इंदौर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 तक की कहानी को बेहद रोचक अंदाज में लिखती हैं। परिवार के साथ यात्रा पर निकलने की खुशी, स्टेशन की भागदौड़ और ट्रेन पकड़ने की जल्दी के बीच इंदौर की पहचान अन्नपूर्णा के पोहे को भी वह अपनी कहानी का हिस्सा बनाती हैं।

इसके बाद यात्रा उन्हें हिमालय की ओर ले जाती है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के साथ Kervi ने हनुमान चट्टी, धारी देवी, माणा गांव, ऋषिकेश और गिरिराज जी जैसे पड़ावों को भी अपनी किताब में जगह दी है। हर जगह को उन्होंने सिर्फ एक पर्यटन स्थल की तरह नहीं देखा, बल्कि वहां की आस्था, मान्यताओं और अपने अनुभवों के नजरिए से समझने की कोशिश की।

यमुनोत्री से मिला आध्यात्मिक अनुभव

यमुनोत्री के अध्याय में Kervi ने कठिन पहाड़ी रास्तों, ठंड, मंदिर की घंटियों और सूर्यकुंड के अनुभव को दर्ज किया है। वह लिखती हैं कि कठिन यात्रा के बावजूद किसी ने शिकायत नहीं की, क्योंकि कुछ यात्राएं आराम से कहीं बड़ी होती हैं। यमुनोत्री के अनुभव को वह मंदिर तक पहुंचने से आगे की आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में देखती हैं।

गंगोत्री में नदी से सीखा आगे बढ़ना

गंगोत्री पहुंचकर Kervi ने भागीरथी नदी को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाया। मां गंगा की कथा, मंदिर में दर्शन और नदी के किनारे बिताए पलों को उन्होंने भावनात्मक अंदाज में लिखा है। इसी अनुभव से वह जीवन का एक बड़ा सबक निकालती हैं—जैसे नदी रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ती रहती है, वैसे ही इंसान को भी कठिनाइयों के बीच आगे बढ़ते रहना चाहिए।

केदारनाथ में दिखी दृढ़ता, बद्रीनाथ में मिली कृतज्ञता

केदारनाथ को Kervi ने यात्रा की सबसे अलग अनुभूतियों में शामिल किया है। मंदिर, हिमालय, ‘हर हर महादेव’ के जयकारों और 2013 की आपदा के संदर्भ में वह केदारनाथ को दृढ़ता और resilience का प्रतीक बताती हैं। वहीं बद्रीनाथ में पहुंचकर उनकी भावनाएं इच्छा और अपेक्षा से आगे बढ़कर कृतज्ञता में बदल जाती हैं।

माणा में इतिहास और पौराणिक कथाओं से जुड़ाव

यात्रा के दौरान माणा गांव ने भी Kervi को खास तौर पर प्रभावित किया। व्यास गुफा, गणेश गुफा, सरस्वती नदी और भीम पुल के माध्यम से उन्होंने महाभारत से जुड़ी परंपराओं और कथाओं को अपने नजरिए से प्रस्तुत किया। खास बात यह है कि गणेश गुफा का उल्लेख करते हुए Kervi खुद को एक युवा लेखिका के रूप में उस परंपरा से जुड़ा महसूस करती हैं।

ऋषिकेश की गंगा आरती और गिरिराज जी ने पूरा किया सफर

चारधाम यात्रा के बाद ऋषिकेश की गंगा आरती का वर्णन किताब के सबसे खूबसूरत हिस्सों में से एक है। सैकड़ों दीपों, मंत्रों और गंगा की लहरों के बीच Kervi अपनी पूरी यात्रा को याद करती हैं। इसके बाद यात्रा का एक अनियोजित अंतिम पड़ाव गिरिराज जी बनता है, जहां गोवर्धन परिक्रमा और ‘राधे-राधे’ के माहौल के बीच उन्हें भक्ति का एक अलग रूप महसूस होता है।

किताब के Epilogue में Kervi लिखती हैं कि वह घर से हिमालय देखने निकली थीं, लेकिन लौटते समय ऐसा लगा जैसे हिमालय का एक हिस्सा उनके भीतर ही बस गया है। उनके लिए चारधाम यात्रा सिर्फ चार मंदिरों के दर्शन नहीं रही, बल्कि विश्वास, धैर्य, कृतज्ञता, प्रकृति और स्वयं को समझने की यात्रा बन गई।

एक स्कूली छात्रा की नजर से लिखी गई यह किताब बताती है कि यात्रा केवल जगहें देखने का नाम नहीं, बल्कि अनुभवों को महसूस करने और उन्हें शब्द देने का भी नाम है। Kervi Sharma की ‘4Dham Diaries 2026’ इसी सोच का खूबसूरत उदाहरण बनकर सामने आती है।