4 साल से इंदौर में अटका था सड़क का काम, कीचड़ में बैठे पार्षद तो 8 घंटे में जागा निगम, अब 2 दिन में खुलेगा रास्ता

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By Raj RathorePublished On: August 21, 2026

इंदौर में विकास कार्यों की रफ्तार और जमीनी हकीकत की तस्वीर भावना नगर-पालदा नाका सड़क पर देखने को मिल रही है। करीब चार साल पहले ड्रेनेज लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़क आज तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी। कुछ महीने काम चलने के बाद ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया और इसके बाद सड़क की स्थिति जस की तस बनी रही।

लंबे समय से परेशान रहवासी कई बार नगर निगम में शिकायत कर चुके थे, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। आखिरकार शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी रहवासियों के साथ सड़क पर उतर आए और कीचड़ के बीच धरने पर बैठ गए।

चार साल से सड़क पर कीचड़

पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि सड़क का काम करीब चार साल पहले ड्रेनेज लाइन बिछाने के लिए शुरू किया गया था। काम कुछ समय तक चला, लेकिन बाद में अधूरा छोड़ दिया गया।

बारिश होते ही पूरी सड़क कीचड़ में बदल जाती है। इससे पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आसपास के रहवासियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

यह सड़क वार्ड 75 और 77 के बीच आती है और आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।

8 घंटे धरना, शाम तक शुरू हुआ सड़क का काम

सड़क की बदहाल स्थिति के विरोध में पार्षद और रहवासी करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठे रहे। धरने की जानकारी मिलने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

दोपहर बाद जोनल अधिकारी तन्मय सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे लोगों से चर्चा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर सड़क को आवागमन के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

आश्वासन मिलने के बाद शाम करीब 4 बजे धरना समाप्त कर दिया गया। इसके कुछ देर बाद ही मौके पर सड़क का काम भी शुरू कर दिया गया।

‘दो दिन में सड़क चालू करने का आश्वासन’

पार्षद कुणाल सोलंकी ने कहा कि रहवासी पिछले साढ़े तीन साल से सड़क की बदहाली झेल रहे हैं। बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से शिकायतें करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण रहवासियों के साथ धरने पर बैठने का फैसला लिया गया।

अधिकारियों के दो दिन में सड़क को आवागमन के लिए खोलने के आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया। अब रहवासियों की नजर इस बात पर है कि निगम तय समय सीमा में सड़क का काम पूरा कर पाता है या नहीं।