मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब बनाने और देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने की सरकार की कोशिशों के बीच इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निवेशकों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कारोबारी विजय सिंह ने उद्योग स्थापित करने के लिए भाजपा नेता मयूरेश पिंगले से एक जमीन का सौदा किया। इसके बाद उन्होंने 2.18 करोड़ रुपए से अधिक की राशि चुकाई, लेकिन आरोप है कि रकम लेने के बाद भी न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही कब्जा दिया गया।
कारोबारी का दावा है कि न्याय के लिए वह पिछले कई महीनों से पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।
16 हजार वर्गफीट जमीन का सौदा
मामला सांवेर क्षेत्र के ग्राम भंवरासला स्थित सर्वे नंबर 200/5/1 की करीब 16 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन सुरेश पिता विट्ठलराव पिंगले के नाम बताई गई है। कारोबारी विजय सिंह सोनगरा, निवासी स्नेहलतागंज, यहां ट्रांसफॉर्मर का प्लांट लगाना चाहते थे। इसी सिलसिले में उन्होंने जमीन की तलाश शुरू की। मामले में सुरेश पिंगले के बेटे मयुरेश पिंगले का नाम भी सामने आया है।
बताया गया कि 11 मार्च 2023 को कारोबारी की सुरेश पिंगले से मुलाकात हुई। जमीन का सौदा 2 करोड़ 16 लाख 16 हजार रुपए में तय हुआ। कारोबारी के अनुसार सौदे की रकम से भी अधिक, कुल 2 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया। यह राशि आरटीजीएस और नकद के माध्यम से सुरेश पिंगले, उनके बेटे मयुरेश पिंगले और मैनेजर राजेश जैन को दी गई।
रकम लेते समय डायरी में हस्ताक्षर
कारोबारी का आरोप है कि नकद राशि लेते समय आरोपितों ने बाकायदा डायरी में हस्ताक्षर किए। पूरी रकम का भुगतान करने के बाद जब जमीन की रजिस्ट्री और कब्जे की बात आई तो कथित तौर पर टालमटोल शुरू कर दी गई। आरोप है कि लंबे समय तक रजिस्ट्री नहीं की गई और जमीन का कब्जा भी कारोबारी को नहीं सौंपा गया।
पीड़ित का कहना है कि जब उसने अपने हक की मांग की तो उसके साथ कथित तौर पर दादागीरी, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। करीब डेढ़ साल से परेशान कारोबारी अब पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगाने को मजबूर है।
चार महीने से लगा रहे चक्कर
पीड़ित के मुताबिक पिछले करीब चार महीनों से वह बाणगंगा थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक शिकायत लेकर पहुंच रहा है। शिकायत की प्रतियां अधिकारियों को देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मुख्य आरोपी मयुरेश पिंगले के भाजयुमो से जुड़े होने के कारण परिवार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी रसूख के चलते पुलिस प्रशासन मामले में प्रभावी कार्रवाई करने से बच रहा है और अब तक एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निवेशकों के भरोसे पर उठे सवाल
इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक शहर में यदि किसी कारोबारी को करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी अपनी जमीन और न्याय के लिए पुलिस के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था और निवेशकों के भरोसे दोनों के लिए चिंता का विषय है। सरकार जहां प्रदेश में बड़े निवेश लाने और उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, वहीं ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
अब सवाल यह है कि 2.18 करोड़ रुपए से अधिक की रकम के भुगतान के दावे, बैंक लेनदेन और कथित नकद भुगतान के साक्ष्यों की जांच कब होगी और पीड़ित की शिकायत पर पुलिस एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कब शुरू करेगी?










